खतरनाक ज्वालामुखी सक्रिय: हजारों जानें गईं, वैज्ञानिकों में मची हड़कंप
एल चिचोन, जिसे चिचोनाल भी कहा जाता है, मेक्सिको के चियापास राज्य के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित है और 1982 के विनाशकारी विस्फोट के लिए कुख्यात है। उस समय ज्वालामुखी ने हजारों लोगों की जान ले ली थी और आसपास के पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया था।

2025-2026 में वैज्ञानिकों ने ज्वालामुखी में नई गतिविधियां देखीं, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई। UNAM (नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी ऑफ मेक्सिको) के शोधकर्ताओं ने जून से दिसंबर 2025 तक इसे मॉनिटर किया और क्रेटर में कई बदलाव दर्ज किए।
खतरे के संकेत
क्रेटर लेक का रंग हरा से ग्रे में बदल गया है, और सल्फेट व सिलिका की मात्रा बढ़ गई है। पानी का तापमान 118°C तक पहुंच चुका है, जो सामान्य उबलते पानी से भी अधिक है। हाइड्रोजन सल्फाइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें उबल रही हैं और सल्फर की असामान्य संरचनाएं बन रही हैं।

जून से अगस्त 2025 में भूकंपीय गतिविधि बढ़ी, कई छोटे-छोटे भूकंप आए जिनकी तीव्रता 1.4 से 3.6 मैग्निट्यूड तक रही। 2026 में भी हलचल जारी है और पिछले हफ्ते 100 से अधिक भूकंप दर्ज किए गए। वैज्ञानिक इसे हाइड्रोथर्मल अरेस्ट मानते हैं, यानी यह गतिविधि मुख्य रूप से गर्म पानी और गैसों तक ही सीमित है। अभी तक नया मैग्मा सतह पर नहीं आया है, इसलिए 1982 जैसा बड़ा विस्फोट फिलहाल कम संभावना वाला है। हालांकि छोटे फ्रिएटिक विस्फोट (वाष्प से) हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों की चिंता
डॉ. पैट्रिशिया जाकोमे पाज के अनुसार, ये बदलाव क्रेटर सिस्टम में हो रहे हैं और लगातार मॉनिटरिंग जरूरी है। 1982 का विस्फोट मेक्सिको का सबसे विनाशकारी ज्वालामुखी हादसा था। मार्च-अप्रैल में तीन बड़े विस्फोट हुए, जो VEI 5 स्तर के थे। पाइरोक्लास्टिक फ्लो और सर्ज ने 9 गांव पूरी तरह मिटा दिए थे, और 1900 से 3500 लोग मारे गए थे। राख 40 सेमी तक गिरी, कॉफी, कोको और केला की फसलें नष्ट हुईं, और सल्फर डाइऑक्साइड ने ग्लोबल तापमान को भी प्रभावित किया। NASA के अनुसार, ये विस्फोट स्ट्रेटोस्फियर तक गर्मी ले गया था।

लोग पहले भूकंप से गिरने वाली इमारतों में मारे गए, फिर घर लौटे, लेकिन अप्रैल में सबसे भयानक विस्फोट हुआ।


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