मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव: अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का पलटवार

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार देर रात ईरान के खिलाफ हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर के गिरने की घटना के बाद की गई।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोप लगाया कि हेलिकॉप्टर को ईरान ने निशाना बनाया था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि हेलिकॉप्टर में मौजूद दोनों पायलट सुरक्षित हैं। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिका इस घटना को नजरअंदाज नहीं कर सकता था और जवाबी कदम उठाना जरूरी था।

इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों और अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर ड्रोन हमले किए हैं। वहीं, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनकी सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है और अमेरिका को क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी दी।

हेलिकॉप्टर हादसे को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के एक वर्ग का कहना है कि अपाचे हेलिकॉप्टर संभवतः एक ईरानी ड्रोन से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। मामले की जांच जारी है।

घटनाक्रम की प्रमुख बातें

अमेरिकी एयरस्ट्राइक
अपाचे हेलिकॉप्टर हादसे के बाद अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की। वॉशिंगटन इसे जवाबी कदम बता रहा है, जबकि तेहरान ने कड़ा रुख अपनाया है।

ट्रम्प का बड़ा दावा
एक रिपब्लिकन कार्यक्रम में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बढ़त बनाए हुए है और अगले दो सप्ताह के भीतर "पूरी जीत" की घोषणा संभव है। उन्होंने तेल कीमतों में कमी आने की भी बात कही।

इजराइल की सख्त चेतावनी
इजराइली सेना प्रमुख एयाल जामिर ने संकेत दिया कि हालिया ऑपरेशन अंतिम नहीं है। जरूरत पड़ने पर इजराइल आगे भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

ट्रम्प-नेतन्याहू संबंधों पर चर्चा
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इजराइल संकट के बीच ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रम्प ने संघर्ष को और बढ़ाने को लेकर चिंता जताई है।

अपाचे हेलिकॉप्टर दुर्घटना
होर्मुज स्ट्रेट के निकट समुद्र में अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर गिर गया था। दोनों पायलटों को सुरक्षित बचा लिया गया। रेस्क्यू मिशन में अमेरिकी सेना ने पहली बार ड्रोन बोट का इस्तेमाल किया।

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