जिलाधिकरी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत 'आपला संकल्प' जन जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाई

वाशिम - लिंग अनुपात समाज की संवेदनशीलता और तरक्की का एक अहम संकेत है। जब तक लड़कियों के जन्म, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान को लेकर पॉजिटिव सोच नहीं बनाई जाएगी, तब तक लिंग अनुपात में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं होगी। इसलिए, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के ज़रिए हर परिवार और समाज को लड़कियों की सुरक्षा और उन्हें मज़बूत बनाने की पहल करनी चाहिए। बाल विवाह, लिंग भेदभाव को रोकना और लड़कियों को बराबर मौके देना समय की ज़रूरत है। जिला कलेक्टर योगेश कुंभेजकर ने अपील की कि प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों को भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेना चाहिए और लिंग अनुपात बढ़ाने के लिए मिलकर कोशिश करनी चाहिए।

केंद्र सरकार के बड़े कैंपेन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत, 'बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र - हमारा संकल्प' कैंपेन को अच्छे से लागू करने के लिए ज़िला प्रशासन की तरफ़ से एक बड़ी जन जागरण रैली निकाली गई। रैली का उद्घाटन ज़िलाधिकरी योगेश कुंभेजकर ने हरी झंडी दिखाकर किया। 

इस मौके पर ज़िला लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी के सेक्रेटरी वी.एस. चौखंडे, ज़िला सर्जन डॉ. अनिल कावरखे, ज़िला महिला और बाल विकास अधिकारी उत्तम शिंदे, प्रोबेशनरी ऑफिसर गणेश ठाकरे और गजानन पडघन, नीति आयोग की ज़िला प्रोजेक्ट हेड श्रीमती नीलिमा भोंगाड़े, ज़िला चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर भगवान ढोले, डेमो स्वप्निल चव्हाण, एडिशनल ज़िला सर्जन डॉ. अविनाश पुरी और दूसरे बड़े लोग मौजूद थे।

इस पहल का मुख्य मकसद बाल विवाह को रोकना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और समाज में सेक्स रेश्यो बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर अवेयरनेस फैलाना था।

रैली के दौरान, इलाका 'बाल विवाह रोको - लड़कियों का भविष्य बचाओ', 'लड़की पढ़ेगी तो समाज बनेगा', जैसे मतलब वाले नारों से भर गया।

अलग-अलग स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट्स ने प्लेकार्ड, पोस्टर और नारों के ज़रिए समाज को एक असरदार मैसेज दिया।

इस मौके पर आगे गाइडेंस देते हुए जिल्हाधिकारी कुंभेजकर ने कहा कि 'लिंग अनुपात समाज की संवेदनशीलता और तरक्की का एक ज़रूरी इंडिकेटर है। जब तक लड़कियों के जन्म, पढ़ाई, सेहत और सम्मान को लेकर पॉज़िटिव सोच नहीं बनाई जाएगी, तब तक लिंग अनुपात में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं होगी। बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है और यह लड़कियों के हर तरह के विकास में रुकावट डालती है। इसलिए, एडमिनिस्ट्रेशन के साथ-साथ पेरेंट्स, टीचर्स, स्टूडेंट्स और समाज के हर तबके को पहल करनी चाहिए और बाल विवाह रोकने और लिंग अनुपात बढ़ाने के लिए मिलकर कोशिश करनी चाहिए।

मशहूर लोगों ने बाल विवाह रोकथाम एक्ट, लड़कियों की सेहत और पढ़ाई के महत्व के साथ-साथ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत होने वाली अलग-अलग एक्टिविटीज़ के बारे में जानकारी दी।
इस मौके पर यह भी अपील की गई कि अगर कहीं बाल विवाह होता दिखे तो तुरंत प्रशासन को बताएं।

जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण और संबंधित एजेंसियों की मिली-जुली कोशिशों से यह पहल सफलतापूर्वक की गई। इस मौके पर अपील की गई कि हर नागरिक जागरूक रहे और महाराष्ट्र को बाल विवाह से मुक्त, सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त लड़कियों को बनाने में सक्रिय रूप से हिस्सा ले।
रैली में कई स्कूल और कॉलेज के छात्रों ने हिस्सा लिया।

रिपोर्टर - नागेश अवचार

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