वाशिम जिला सीमा पर महात्मा फुले समता परिषद के चित्ररथ का भव्य स्वागत
वाशिम : ५ मई क्रांतिसूर्य महात्मा जोतीराव फुले की द्विशताब्दी जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में 'अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद' द्वारा निकाले गए विशेष चित्ररथ का आज दोपहर वाशिम जिला प्रवेश द्वार पर उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया।
हिंगोली से रवाना हुआ यह चित्ररथ दोपहर लगभग २ बजे वाशिम जिले की सीमा में दाखिल हुआ। इस अवसर पर समता परिषद के प्रदेश सचिव प्राध्यापक अरविंद गाभणे ने महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले की प्रतिमाओं पर पुष्पहार अर्पित कर उन्हें अभिवादन किया।
महात्मा फुले द्विशताब्दी वर्ष का आयोजन
महात्मा फुले के द्विशताब्दी वर्ष (११ अप्रैल २०२६ से १० अप्रैल २०२७) के निमित्त केंद्र और राज्य सरकार द्वारा विभिन्न उपक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में, समता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष छगनराव भुजबळ के मार्गदर्शन और पूर्व सांसद समीर भुजबळ एवं विधायक पंकज भुजबळ की संकल्पना से इस चित्ररथ का निर्माण किया गया है। 'समता, बंधुता, न्याय और ज्ञान' के मूल्यों का प्रसार करने के उद्देश्य से यह रथ संपूर्ण महाराष्ट्र का भ्रमण कर रहा है।
आकर्षण का केंद्र: भिड़ेवाड़ा की प्रतिकृति
इस भव्य चित्ररथ को देखने के लिए नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रथ पर बनी कलाकृतियाँ सभी का ध्यान आकर्षित कर रही हैं:
प्रतिमाएँ: क्रांतिसूर्य महात्मा जोतीराव फुले, ज्ञानज्योती सावित्रीबाई फुले, राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज और भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की अत्यंत सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: पुणे स्थित ऐतिहासिक 'भिड़ेवाड़ा' (जहाँ पहली कन्या शाला शुरू हुई थी) की प्रतिकृति इस रथ पर बनाई गई है।
प्रतीक: महात्मा फुले द्वारा लिखित पुस्तकें और 'कलम' के प्रतीकों के माध्यम से समाज सुधार का प्रभावी संदेश दिया जा रहा है।
उपस्थिति
इस स्वागत समारोह के दौरान समता परिषद के जिला प्रचार प्रमुख जावेद धनु भवानीवाले, वाशिम तालुका अध्यक्ष ज्ञानेश्वर वाशिमकर, अमोल गाभणे, शंकर इरतकर, कीर्ति कुमार गावंडे सहित बड़ी संख्या में शिव-शाहू-फुले-आंबेडकर विचारधारा के अनुयायी उपस्थित थे।
यह चित्ररथ कल, ६ मई को यवतमाल जिले में प्रवेश करेगा। वाशिम शहर में इस रथ के आगमन से सामाजिक सद्भाव और जन-जागृति का वातावरण देखने को मिल रहा है।
मुख्य विशेषताएँ: इस चित्ररथ में महात्मा फुले का संपूर्ण साहित्य, ऐतिहासिक भिड़ेवाड़ा की प्रतिकृति और महापुरुषों की प्रतिमाओं के साथ ज्ञान के प्रतीकों की प्रभावी प्रस्तुति की गई है।
रिपोर्टर : नागेश अवचार
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