ज्ञानदान के 29 वर्ष पूरे; कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक ताराचंद वाघमारे सेवानिवृत्त

वाशिम : हाथ में चॉक और मन में विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प लेकर करीब 29 वर्षों तक शिक्षा की अलख जगाने वाले कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक ताराचंद सुखदेव वाघमारे 31 जुलाई 2026 को अपनी लंबी शिक्षकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सहकर्मी शिक्षकों के मार्गदर्शन में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

मालेगांव तहसील के कुत्तरडोह गांव के निवासी ताराचंद वाघमारे ने 1 अगस्त 1997 को तत्कालीन अकोला जिला परिषद के अंतर्गत गौळखेडा गांव से शिक्षक के रूप में अपने सेवाकाल की शुरुआत की। सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण क्षेत्र में भी उन्होंने विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुचि पैदा करने का सराहनीय कार्य किया।
स्थानांतरण हुए, लेकिन छात्रहित की भावना नहीं बदली
वर्ष 2008 में उनका तबादला खिर्डा में हुआ, जहां भी उन्होंने पूरी निष्ठा से अध्यापन के साथ-साथ विद्यालय एवं शासन की विभिन्न जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
मतदाता सूची कार्य में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
वर्ष 2012 से उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्होंने अनेक शिक्षकों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देकर निर्वाचन संबंधी कार्यों को सुचारु रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
छात्रवृत्ति कार्य में एक दशक का उल्लेखनीय योगदान
वर्ष 2015 से लेकर सेवानिवृत्ति तक उन्होंने स्वर्ण जयंती छात्रवृत्ति योजना का कार्य लगातार संभाला। पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ समय पर मिले तथा शैक्षणिक सामग्री का वितरण व्यवस्थित रूप से हो, इसके लिए उन्होंने विशेष प्रयास किए।
वर्ष 2018 में उनका स्थानांतरण जिला परिषद प्राथमिक शाला, जऊळका में हुआ। अपने सेवाकाल के अंतिम वर्षों में भी उन्होंने पूरे समर्पण के साथ विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए कार्य किया और इसी विद्यालय से सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए।
शिक्षक संगठन में भी निभाई सक्रिय भूमिका
ताराचंद वाघमारे का कार्य केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने परिवर्तन शिक्षक संगठन के माध्यम से शिक्षकों के हितों की रक्षा तथा विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। सहकर्मी शिक्षकों को मार्गदर्शन और सहयोग देना उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान रही।
हजारों विद्यार्थियों के जीवन पर छोड़ी अमिट छाप
1 अगस्त 1997 से शुरू हुआ उनका शिक्षकीय सफर 31 जुलाई 2026 को पूर्ण हुआ। लगभग 29 वर्षों की सेवा में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दी। अध्यापन, प्रशासनिक जिम्मेदारियां, मतदाता सूची, छात्रवृत्ति कार्य और शिक्षक संगठन में उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
सेवानिवृत्ति उनके कार्य का अंत नहीं, बल्कि जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है। विद्यार्थियों का स्नेह, सहकर्मियों का सम्मान और समाज में अर्जित प्रतिष्ठा उनके साथ रहेगी।
उनकी सेवानिवृत्ति पर सहकर्मी शिक्षक, विद्यार्थी, पूर्व विद्यार्थी, अभिभावक तथा क्षेत्र के नागरिकों ने उनके उज्ज्वल, स्वस्थ, सुखद एवं सम्मानपूर्ण जीवन की शुभकामनाएं दी हैं।

रिपोर्टर : नागेश अवचार
 

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