आंधी-बारिश का कहर: उत्तर भारत में प्री-मानसून ने बढ़ाई मुश्किलें
देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पंजाब समेत 15 से अधिक राज्यों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन को प्रभावित किया है। जहां एक ओर बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं, बिजली गिरने और अचानक आई बाढ़ जैसी परिस्थितियों ने भारी नुकसान पहुंचाया है।
सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में उत्तर प्रदेश और बिहार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान आंधी-तूफान और खराब मौसम के कारण 31 लोगों की मौत की खबर है। सहारनपुर जिले में भारी बारिश के बाद पहाड़ी क्षेत्रों से आए तेज जलप्रवाह ने भयावह स्थिति पैदा कर दी। कई वाहन पानी के तेज बहाव में बह गए, जिससे स्थानीय प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य चलाने पड़े। राज्य के सभी 75 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।
बिहार में भी मौसम का रौद्र रूप देखने को मिला। आंधी, बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं में 17 लोगों की जान चली गई। राजधानी पटना में खराब मौसम के कारण हवाई सेवाएं प्रभावित रहीं। चार उड़ानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़ना पड़ा, जबकि कई उड़ानें देरी से संचालित हुईं। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने राज्य के अनेक जिलों में आगामी दिनों के लिए भी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है।
राजस्थान में तेज आंधी और ओलावृष्टि की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई जिलों में तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की गई है। वहीं पंजाब के कुछ क्षेत्रों में ओले गिरने और तेज बारिश होने से मौसम सुहावना तो हुआ, लेकिन फसलों और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ा।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्री-मानसून गतिविधियां दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने का संकेत हैं। हालांकि, इनके साथ आने वाली तेज हवाएं, बिजली और भारी वर्षा कई बार जान-माल के लिए खतरा बन जाती हैं। ऐसे समय में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना चाहिए और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए।
यह घटनाक्रम एक बार फिर बताता है कि बदलते मौसम और चरम जलवायु परिस्थितियों के दौर में आपदा प्रबंधन और मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। प्रशासन और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से ही ऐसे प्राकृतिक संकटों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

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