बूथ पर दीदी के तीखे तेवर, शुभेंदु बोले- हार के डर से बौखलाईं ममता!

बंगाल की धरती आज चुनावी बारूद से दहक रही है! तारीख 29 अप्रैल, दिन बुधवार....जी हां पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का वह निर्णायक दिन, जहाँ 142 सीटों पर किस्मत का फैसला होना है। लेकिन सबकी नजरें टिकी हैं दक्षिण कोलकाता की उस हॉट सीट पर, जिसे ममता बनर्जी का अभेद्य किला कहा जाता है.....भवानीपुर! आज सुबह की पहली किरण के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी अग्निपरीक्षा के लिए मोर्चा संभाल लिया। यह महज एक चुनाव नहीं, बल्कि नंदीग्राम की हार का हिसाब चुकता करने और अपनी साख बचाने की एक आर-पार की जंग है। एक तरफ दीदी का दबदबा है, तो दूसरी तरफ उनके ही पुराने सिपहसालार और अब कट्टर प्रतिद्वंद्वी शुभेंदु अधिकारी की ललकार!

दरअसल, आमतौर पर ममता बनर्जी दोपहर में वोट डालने निकलती हैं, लेकिन इस बार उनके तेवर बदले हुए थे। जी हां सुबह 8 बजने से पहले ही मुख्यमंत्री कालीघाट स्थित अपने आवास से निकल पड़ीं। काली शर्ट और सफेद साड़ी में दीदी का काफिला सीधे भवानीपुर के मतदान केंद्रों की ओर बढ़ा। चेतला से लेकर चक्रबेड़िया तक, ममता ने खुद कमान संभाली। उनके साथ उनके उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी भी पल-पल की रिपोर्ट ले रहे थे। बताया गया कि मुख्यमंत्री और अभिषेक पूरी रात जागकर स्थिति पर नजर रखे हुए थे। वहीं चक्रबेड़िया के एक मतदान केंद्र के बाहर बैठते ही ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर आरोपों की झड़ी लगा दी। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा, कल रात से ही आतंक का खेल शुरू हो गया है। बाहरी राज्यों से आए पर्यवेक्षक बीजेपी के इशारे पर नाच रहे हैं। पुलिस थानों में जाकर हमारे एजेंटों को गिरफ्तार करने का दबाव बनाया जा रहा है। 

ममता ने अपने मोबाइल पर एक घायल कार्यकर्ता की फोटो दिखाते हुए दहाड़ लगाई, देखिए यह अत्याचार! क्या लोकतंत्र में ऐसे चुनाव होते हैं? बीजेपी जबरन धांधली करना चाहती है, लेकिन हम झुकेंगे नहीं। हमारे कार्यकर्ता जान दे देंगे, लेकिन मैदान नहीं छोड़ेंगे। 

वहीं दूसरी तरफ भवानीपुर के खिदिरपुर में मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने भी जमकर पलटवार किया। जब शुभेंदु और ममता एक ही मतदान केंद्र पर आमने-सामने आए, तो माहौल में तनाव और बढ़ गया। शुभेंदु ने तंज कसते हुए कहा, मुख्यमंत्री हार के डर से बौखला गई हैं। वह गुंडों के साथ घूम रही हैं और लोगों में डर फैला रही हैं। मैं अकेला अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ जा रहा हूँ, उन्हें भीड़ लाने की क्या जरूरत है? उन्होंने साफ़ कहा कि बंगाल की जनता इस बार दीदी को विदा करने का मन बना चुकी है।

वहीं चुनावी शोर के बीच कई जगहों से अव्यवस्था की खबरें भी आईं। बारानगर के बूथ नंबर 72 पर मतदाताओं ने जमकर हंगामा किया। आरोप लगा कि ईवीएम को 5 बार बदला गया, फिर भी मशीन शुरू नहीं हुई। घंटों धूप में खड़े मतदाताओं ने गुस्से में घर वापस जाना शुरू कर दिया। वहीं फल्टा में बीजेपी प्रत्याशी ने आरोप लगाया कि ईवीएम का बटन ही काम नहीं कर रहा है। इसी बीच टीएमसी कार्यकर्ताओं ने RG कर रेप पीड़िता की मां और बीजेपी प्रत्याशी रत्ना देबनाथ को घेराव करते हुए भारी विरोध किया। हालांकि, इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को संभाल लिया। आपको बता दें आज दूसरे चरण में सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए जो पहले कभी नहीं देखे गए।

32 लाख से अधिक मतदाता 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद कर रहे हैं।
2,321 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनात हैं, जिनमें से 273 सिर्फ कोलकाता में हैं।
ड्रोन और वेबकास्टिंग से हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
दोपहर 11 बजे तक ही 40% मतदान हो चुका था, जो बंगाल के चुनावी जुनून को दर्शाता है।

जाहिर है आज बंगाल की 142 सीटों पर हो रहा यह मतदान तय करेगा कि सोनार बांग्ला का सपना किसका पूरा होगा। एक तरफ ममता बनर्जी की साख दांव पर है, तो दूसरी तरफ बीजेपी का बढ़ता जनाधार। हिंसा की छिटपुट घटनाओं, ईवीएम की खराबी और तीखी बयानबाजी के बीच बंगाल की जनता लंबी कतारों में खड़ी है। ऐसे में सवाल है कि आरजी कर कांड की गूँज और सत्ता विरोधी लहर के बीच क्या दीदी अपना किला बचा पाएंगी या शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर में नया इतिहास लिखेंगे? फिलहाल जवाब अभी ईवीएम में कैद हो रहा है, लेकिन शोर और सस्पेंस चरम पर है। अब पूरी दुनिया की नजरें 4 मई के नतीजों पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि बंगाल की गद्दी पर कौन राज करेगा। यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि एक महायुद्ध है जिसका क्लाइमेक्स बस कुछ ही दिन दूर है!

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