क्या भारत में बंद हो सकता है वॉट्सएप? यूजर्स के डेटा और प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा की डेटा साझा करने की नीति पर गंभीर चिंता जताई। यह सुनवाई भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर हो रही थी, जिसमें 2021 की “स्वीकार करो या छोड़ दो” प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर मेटा पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

इससे पहले 4 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने CCI द्वारा लगाए गए जुर्माने को सही ठहराया था, हालांकि उसने विज्ञापन उद्देश्यों के लिए डेटा साझा करने पर लगाए गए पांच साल के पूर्ण प्रतिबंध को हटाते हुए आंशिक अनुमति दी थी। बाद में 15 दिसंबर 2025 को जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि विज्ञापन से जुड़ा डेटा शेयर किया जा सकता है, लेकिन उपयोगकर्ताओं को हर तरह के डेटा साझाकरण चाहे वह विज्ञापन से संबंधित हो या नहीं से बाहर निकलने (ऑप्ट-आउट) का स्पष्ट अधिकार देना अनिवार्य होगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने व्हाट्सएप और मेटा की अपीलों के साथ-साथ NCLAT के आदेश को चुनौती देने वाली CCI की अलग अपील पर भी सुनवाई की। कोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा कि देश में निजता के मौलिक अधिकार के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। पीठ ने इस तरह की डेटा शेयरिंग को “संवैधानिक व्यवस्था का मजाक” करार देते हुए सवाल उठाया कि जब यूजर्स को मजबूरी में नीति मानने के लिए कहा जाता है, तो ऐसी सहमति को वैध कैसे माना जा सकता है।


No Previous Comments found.