सफेद सेवंती की खेती से रोजाना 700-800 रुपये, किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत
अरावली जिले के मालपुर तालुका के कटकुवा गांव के किसान रावजीभाई मकवाना ने अपनी खेती के नए अंदाज से सबका ध्यान खींचा है। उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय सफेद सेवंती के पौधे लगाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।
रावजीभाई मकवाना ने लगभग 400 सफेद सेवंती के पौधे अपने खेत में लगाए हैं। इन पौधों के सुगंधित और खूबसूरत फूलों की मांग काफी अधिक है, खासकर धार्मिक समारोहों, पूजा, माला बनाने और सजावट के लिए। इसकी वजह से वह हर दिन 700 से 800 रुपये की कमाई कर रहे हैं, जो ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए एक नई राह और प्रेरणा साबित हो रही है।
सफेद सेवंती के फूल भारत में “फूलों की रानी” के रूप में जाने जाते हैं। इनका उपयोग दिवाली, नवरात्रि, शादियों, धार्मिक आयोजनों और मालाओं में बड़े पैमाने पर किया जाता है। सफेद किस्म को पवित्रता और सुंदरता का प्रतीक माना जाता है।
सिर्फ आर्थिक लाभ ही नहीं, सेवंती के पौधे खेती के लिए अन्य लाभ भी प्रदान करते हैं। ये प्राकृतिक रूप से कीड़ों और नेमाटोड जैसे हानिकारक जीवों को दूर रखते हैं, जिससे अन्य फसलें सुरक्षित रहती हैं और रासायनिक दवाओं का उपयोग कम होता है। इसलिए सफेद सेवंती की खेती न केवल लाभकारी है, बल्कि यह ऑर्गेनिक और सतत कृषि के लिए भी उपयोगी है।
रावजीभाई मकवाना की यह पहल साबित करती है कि छोटे पैमाने पर भी नई और सोच-समझकर की गई खेती किसानों की आर्थिक स्थिति बदल सकती है और उन्हें आत्मनिर्भर बना सकती है।


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