औषधीय फसल सफेद मूसली की खेती कैसे करें?
सफेद मूसली (White Musli, वैज्ञानिक नाम Chlorophytum borivilianum) एक महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों में किया जाता है। इसकी जड़ों में प्रोटीन और औषधीय गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
भूमि और जलवायु
सफेद मूसली हल्की दोमट या बलुई मिट्टी में अच्छी तरह उगती है।
इसकी खेती के लिए हल्की ढलान वाली भूमि उपयुक्त होती है।
यह फसल गर्मी और आर्द्रता वाले क्षेत्रों में अच्छी होती है, लेकिन अत्यधिक नमी या जलभराव से बचना चाहिए।
बुवाई और रोपण
सफेद मूसली की खेती आमतौर पर जड़ों या पौधों के माध्यम से की जाती है।
रोपण के लिए साल का सबसे अच्छा समय जुलाई से अगस्त के बीच है।
रोपाई की दूरी लगभग 30x30 से 45x45 सेंटीमीटर रखी जाती है, ताकि पौधे को पर्याप्त जगह मिल सके।
सिंचाई और पोषण
मूसली की फसल को सप्ताह में 2-3 बार हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है।
खेत में संतुलित उर्वरक और जैविक खाद डालना फसल की गुणवत्ता और जड़ के वजन को बढ़ाता है।
कीट और रोग नियंत्रण
फसल में मोल्ड, फफूंदी और कीट लग सकते हैं।
जैविक या नियंत्रित रासायनिक उपायों से इनसे बचाव किया जा सकता है।
कटाई और उपज
सफेद मूसली की जड़ों की कटाई आमतौर पर 18-24 महीने बाद होती है।
प्रत्येक हेक्टेयर से लगभग 200-250 किग्रा जड़ प्राप्त की जा सकती है।
कटाई के बाद जड़ों को अच्छी तरह साफ करके सुखाना जरूरी होता है।
लाभ
सफेद मूसली की जड़ आयुर्वेदिक औषधियों में उपयोग होने के कारण बाजार में अच्छी कीमत प्राप्त होती है।
यह फसल किसानों के लिए लाभदायक और कम जोखिम वाली मानी जाती है।
छोटे और मध्यम किसान भी इसे आसानी से उगा सकते हैं

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