बिना संविधान के कैसा होता आम नागरिक का जीवन?
सोचिए… अगर आज़ादी के बाद भारत के पास कोई संविधान नहीं होता…
न आपके बोलने का हक़… न वोट डालने का अधिकार… न बराबरी का कानून…
क्या आप आज़ाद होते? या फिर ताकतवर की मर्ज़ी पर ज़िंदगी जी रहे होते?
आज 26 जनवरी है…लेकिन सवाल ये है अगर संविधान न होता, तो भारत कैसा होता?
बिना संविधान - बिना पहचान
संविधान ने भारत को सिर्फ़ कानून नहीं दिया..इसने देश को एक पहचान दी... अगर संविधान न होता....भारत “गणराज्य” नहीं कहलाता.. राष्ट्रपति, संसद, सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाएं ही न होतीं

न बोलने की आज़ादी..न धर्म चुनने की स्वतंत्रता.. न बराबरी का अधिकार
सोचिए…अगर आप गलत के खिलाफ़ आवाज़ उठाते..और कोई सुनने वाला ही न होता…संविधान ने आम आदमी को ताकत दी
महिलाओं और कमजोर वर्गों की हालत
बिना संविधान....महिलाओं को समान अधिकार नहीं.. दलितों और आदिवासियों को सुरक्षा नहीं..आरक्षण जैसी व्यवस्था ही न होती...संविधान नहीं होता, तो बराबरी सिर्फ़ किताबों में होती… ज़िंदगी में नहीं।
लोकतंत्र या अराजकता?
संविधान के बिना:चुनाव नहीं, जनता की सरकार नहीं, शायद सत्ता बंदूक या ताकत से चलती
संविधान ने भारत को कैसे जोड़ा?
अलग भाषा,अलग धर्म,अलग संस्कृति..लेकिन एक संविधान,, एक देश.. एक कानून..एक पहचान
आज हम जो सवाल पूछ रहे हैं ,,“अगर संविधान न होता?”उसका जवाब डरावना है…क्योंकि तब भारत शायद भारत नहीं होता।
संविधान कोई मोटी किताब नहीं…ये वो ताकत है.. जो एक आम इंसान को... सबसे ताकतवर बना देती है। आज 26 जनवरी है… सिर्फ़ झंडा फहराने का दिन नहीं, बल्कि ये याद दिलाने का दिन है कि संविधान है, तभी हम हैं। जय हिंद


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