महिला आरक्षण बिल गिरने से BJP को बड़ा फायदा!
भारतीय संसदीय इतिहास में शुक्रवार का दिन किसी बड़े उलटफेर से कम नहीं था। मोदी सरकार, जो पिछले 12 सालों से सदन में अजेय दिख रही थी, उसे अपनी पहली बड़ी संसदीय हार का स्वाद चखना पड़ा। जी हां 131वां संविधान संशोधन विधेयक, जो देश की आधी आबादी को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत हक देने का वादा करता था, संख्या बल के अभाव में दम तोड़ गया। लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं हुआ। जैसे ही विधेयक गिरा, राजनीति के बिसात पर नई चालें चली गईं। शनिवार रात 8:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब राष्ट्र को संबोधित किया, तो उनके शब्दों में विपक्ष के लिए तीखी कड़वाहट और महिलाओं के लिए संवेदना थी। प्रधानमंत्री का यह संबोधन विपक्ष की आंखों में खटक गया और कपिल सिब्बल से लेकर मनोज झा तक, पूरी 'इंडिया' गठबंधन ब्रिगेड ने इसे चुनावी स्टंट और आचार संहिता का उल्लंघन बताकर मोर्चा खोल दिया है।
दरअसल, राज्यसभा सांसद और दिग्गज कानूनविद् कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री के संबोधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे किसी प्रधानमंत्री द्वारा पद की गरिमा को कम करने वाला कृत्य बताया। सिब्बल का दावा है कि जब देश में चुनाव का माहौल हो और आचार संहिता लगी हो, तब प्रधानमंत्री को भारतीय ध्वज के बैकग्राउंड में चुनावी एजेंडा सेट करने वाला भाषण नहीं देना चाहिए था। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी तंज कसा कि कोई भी संस्था इस खुले उल्लंघन पर कुछ नहीं करेगी। उन्होंने सीधे पीएम से सवाल किया कि "आपने प्रधानमंत्री पद का महत्व इस तरह क्यों कम कर दिया है?" आपको बता दें सिब्बल अकेले नहीं थे, पूरा विपक्ष एक सुर में पीएम पर हमलावर दिखा। CPIM के जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि पीएम ने विपक्ष की तुलना भ्रूण हत्या करने वालों से करके लोकतांत्रिक मर्यादा को तार-तार कर दिया है। इतना ही नहीं TMC के साकेत गोखले ने चुनाव आयोग को चुनौती दे डाली कि अगर हिम्मत है तो इस संबोधन के खर्च को बीजेपी के चुनावी खर्च में जोड़ा जाए। वहीं RJD के मनोज झा ने कटाक्ष किया कि यह राष्ट्र के नाम संदेश नहीं, बल्कि एक गढ़ा हुआ चुनावी नैरेटिव है जो सरकार की विफलताओं को छिपाने के लिए लाया गया है।
वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के आरोपों के बीच बीजेपी ने इसे एक बड़े अवसर में बदल दिया है। गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फ्रंट फुट पर आकर मोर्चा संभाला। शाह ने स्पष्ट कर दिया कि विपक्ष का यह जश्न उन्हें बहुत भारी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं का हक छीना है और इसका खामियाजा उन्हें हर चुनाव में भुगतना पड़ेगा। उन्होंने इसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ एक साजिश करार दिया। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस बेनकाब हो गई है। जब गृह मंत्री लिखित में संशोधन देने को तैयार थे, तब भी विपक्ष का अड़ना उनकी महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। लेकिन आपको बता दें खेल यहां खत्म नहीं होता है, बल्कि शुरू होता है। जी हां बीजेपी ने इस हार को अपनी जीत बनाने की तैयारी कर ली है। खास तौर पर उन राज्यों में जहां चुनाव होने वाले हैं। दरअसल, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 'मां-माटी-मानुष' के नारे को टक्कर देने के लिए बीजेपी अब 'महिला आरक्षण के विरोध' को हथियार बनाएगी। संदेशखाली और आरजी कर कांड के बाद, विधेयक का गिरना टीएमसी को महिला विरोधी साबित करने का बीजेपी के लिए सुनहरा मौका है।
वहीं तमिलनाडु और केरल में साक्षरता और महिला जागरूकता अधिक है। बीजेपी यहाँ तर्क दे रही है कि एमके स्टालिन और पिनराई विजयन ने केवल परिसीमन का डर दिखाकर महिलाओं को सत्ता में आने से रोका है। वहीं तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने इसे अपनी जीत बताया है। उनका तर्क है कि यह विधेयक दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक शक्ति को कम करने की एक साजिश थी, जिसे उनकी चिंगारी ने खाक कर दिया।
देखा जाए तो संसद में विधेयक का गिरना और उसके बाद प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन इस बात का साफ संकेत है कि 2026 से लेकर 2029 तक की राजनीति अब महिला वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमने वाली है। बीजेपी जहां अपनी उज्ज्वला, लाडली बहना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के दम पर महिलाओं को अपना साइलेंट वोटर मानती है, वहीं विपक्ष ने इसे क्षेत्रीय अस्मिता और जाति जनगणना से जोड़कर एक नई चाल चल दी है। ऐसे में सवाल है कि क्या बीजेपी इस हार को जनता की अदालत में सहानुभूति की लहर में बदल पाएगी? या विपक्ष का यह तर्क कि यह बिल दक्षिण भारत के खिलाफ एक साजिश थी, लोगों के गले उतरेगा? फिलहाल माहौल पूरी तरह गर्माया हुआ है। अमित शाह की यह चेतावनी कि यह बात दूर तक जाएगी, बता रही है कि आने वाले दिनों में रैलियों के मंच से नारी शक्ति और विपक्ष के धोखे की कहानियां देश के कोने-कोने में सुनाई देंगी। क्योंकि यह सिर्फ एक विधेयक का गिरना नहीं है, यह एक नए और भीषण राजनीतिक युद्ध का आगाज है!

No Previous Comments found.