मोतिहारी में विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग - विराट रामायण मंदिर में श्रद्धा और भव्यता का संगम

बिहार के मोतिहारी में कल एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया गया। इस भव्य आयोजन में श्रद्धा, भव्यता और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। भारी-भरकम शिवलिंग को उठाने और स्थापित करने के लिए 700 टन और 500 टन क्षमता वाली दो विशाल क्रेनें विशेष रूप से मंगाई गई थीं।

भव्य समारोह और पूजा-अर्चना

शिवलिंग स्थापना का कार्यक्रम भव्य गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ। पूजा-पाठ के साथ ही यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावपूर्ण और यादगार रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इस अवसर पर मौजूद थे। मंदिर में मुख्यमंत्री ने पूजा-अर्चना की और मंदिर निर्माण की प्रगति का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि विराट रामायण मंदिर धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके निर्माण से क्षेत्र का विकास नई ऊँचाइयों को छूएगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

श्यान कुणाल का सपना साकार

विराट रामायण मंदिर के निर्माण को लेकर श्यान कुणाल ने कहा कि यह मंदिर उनके पिता का सपना था, जो अब धीरे-धीरे साकार होता दिख रहा है। उन्होंने बताया कि मंदिर का निर्माण तीव्र गति से जारी है और साल 2030 तक यह भव्य मंदिर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। उनका कहना था कि इस मंदिर के निर्माण से न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटन में भी जबरदस्त बढ़ावा होगा, जिससे मोतिहारी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बनाएगा।

शिवलिंग की यात्रा और विशेषता

विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में निर्मित हुआ और 45 दिन की लंबी यात्रा करके बिहार के चंपारण जिले के केसरिया में बने विराट रामायण मंदिर पहुँचा। यह 33 फीट लंबा और 210 टन वजनी ब्लैक ग्रेनाइट का शिवलिंग है।

इस शिवलिंग की सबसे अनोखी बात यह है कि इसमें 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग लगे हैं, जिससे इसे सहस्त्र लिंगम कहा जाता है। स्थापना के दौरान शिवलिंग पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई और पांच नदियों के जल से इसका अभिषेक किया गया।

मोतिहारी के लिए ऐतिहासिक दिन

यह शिवलिंग स्थापना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह मोतिहारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक पल है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए।

भव्यता, श्रद्धा और आधुनिक तकनीक का संगम देखने को मिला इस आयोजन में, और मोतिहारी का यह गौरव हमेशा याद रखा जाएगा।

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