सीएम योगी का शिवपाल और कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- फिर दंगा करवाना चाहते हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। लखनऊ में आयोजित विभाजन विभीषिका दिवस कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने कहा कि देश की आजादी के खिलाफ और भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के नाम पर विश्वविद्यालय बनाने वाले व्यक्ति को समाजवादी पार्टी अपना पैरोकार बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग फिर से दंगा करवाना चाहते हैं।

सीएम योगी ने कहा कि मोहम्मदाबाद के नवाब की पूरी प्रॉपर्टी को बचाने के लिए कांग्रेसियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था, ताकि किसी तरह वह संपत्ति बचाई जा सके। विभाजन विभीषिका दिवस के कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि पूरा देश विभाजन की भीषण त्रासदी के स्मृति दिवस के साथ जुड़ा है। उन्होंने इसे विश्व मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन के दौरान करोड़ों हिंदुओं को अपनी ही मातृभूमि और जन्मभूमि से विस्थापित होना पड़ा, जबकि बड़ी संख्या में हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन लोगों का कत्लेआम हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं थी। उनके मुताबिक, सत्ता प्राप्त करने की लिप्सा इस हद तक पहुंच गई थी कि एक सनातन राष्ट्र के टुकड़े कर दिए गए। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका दिवस इतिहास के काले अध्यायों से सीख लेने की प्रेरणा देता है, लेकिन केवल स्मरण करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

सीएम योगी ने कहा कि इतिहास हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है, जबकि अतीत की गलतियां हमें सीखने का अवसर देती हैं। जब हम इन गलतियों की अनदेखी करते हैं तो इसका मतलब है कि हम उन्हें दोहराने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश गुलाम क्यों हुआ, इस सवाल को समझने की जरूरत है। योगी आदित्यनाथ ने 1526 का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 500 वर्ष पहले आज के संभल में श्री हरिहर मंदिर को तोड़कर वहां गुलामी का ढांचा खड़ा कर दिया गया।

सीएम योगी ने कहा कि अगर उस समय एकजुट होकर इसे रोक लिया गया होता तो अयोध्या में इसे दोहराने का काम नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि सनातनी मौन नहीं रहा, लेकिन वह विभाजित था। उसके पास बल, बुद्धि और वैभव की कमी नहीं थी, कमी सिर्फ एकता की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी से ठीक पहले केवल भारत का ही विभाजन नहीं हुआ था, बल्कि हिंदू और सिख समाज भी बंट गया था। उन्होंने कहा कि सनातन राष्ट्र के रूप में आदिकाल से एक इकाई रहे भारत के विभाजन का प्रभाव समाज पर भी पड़ा।

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