यूपी की 1 करोड़ महिलाओं को ₹1 लाख! योगी सरकार की बड़ी योजना, 2027 से पहले बड़ा दांव?
कहते हैं चुनाव सिर्फ नारों से नहीं जीते जाते...कभी मुद्दे बदलते हैं, कभी समीकरण...और कभी एक ऐसा वोट बैंक सामने आता है, जो पूरी सियासत की दिशा बदल देता है। जी हां राजनीति की इस पिच पर छक्के-चौके वही पार्टी लगाती है जो सही वक्त पर सबसे बड़ा सियासी दांव चलना जानती है! और साल 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के रण में उतरने से पहले ही बाबा योगी आदित्यनाथ ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है, जिसे देखकर विपक्षी खेमे में अभी से खलबली मच गई है। जी हाँ, इस बार यूपी के दंगल में न सिर्फ जाति और मजहब की बात होगी, बल्कि असली किंगमेकर बनकर उभरी है सूबे की 'आधी आबादी' यानी महिला वोटर! योगी सरकार ने 1 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में सीधे एक लाख रुपये पहुँचाने का जो ब्लूचप्रिंट तैयार किया है, उसने चुनावी हवा का रुख ही बदल दिया है। लेकिन सवाल सिर्फ एक लाख रुपये का नहीं है...सवाल ये है कि क्या सुरक्षा के बाद अब महिलाओं की आर्थिक मजबूती भी यूपी की चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बनने जा रही है?
आइए, आज इस स्पेशल रिपोर्ट में हम खोलते हैं इस मेगा प्लान का पूरा कच्चा-चिट्ठा कि कैसे बिहार के फॉर्मूले को मात देते हुए यूपी में लिखा जा रहा है जीत का नया इतिहास!
2017 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत कानून-व्यवस्था, एंटी-रोमियो स्क्वाड और सेफ सिटी प्रोजेक्ट्स रहे हैं। इसी के चलते 2022 के चुनावों में भी महिलाओं ने दिल खोलकर बीजेपी को वोट दिया था। आँकड़े गवाह हैं कि पिछले चुनाव में पुरुषों की तुलना में महिला वोटरों ने बंपर वोटिंग की थी, जहाँ बीजेपी को 48% और सपा को महज 32% महिला वोट मिले थे। लेकिन इस बार सरकार सुरक्षा से आगे बढ़कर महिलाओं की जेब को सीधा मजबूत करने के मूड में है। यानी महिला सिर्फ सुरक्षित रहे, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी भी हो। इसी सोच के तहत सरकार की ओर से महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक मदद और क्रेडिट उपलब्ध कराने की बात सामने आई है।
बताया गया है कि करीब एक करोड़ महिलाओं को एक लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त क्रेडिट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के मुताबिक पहली किस्त 20 हजार रुपये, उसके बाद समय पर भुगतान करने वाली महिलाओं को 30 हजार और 50 हजार रुपये की अगली किस्त देने की बात है। यानी पूरी राशि तीन चरणों में पहुंचाने का मॉडल बताया जा रहा है।
वहीं अब जरा इसे गांव की भाषा में समझिए।
दरअसल, अगर किसी महिला को सिलाई का काम शुरू करना है, छोटी दुकान खोलनी है, डेयरी का काम करना है, ई-रिक्शा चलाना है या कोई छोटा घरेलू कारोबार खड़ा करना है...तो शुरुआती पूंजी उसके लिए सबसे बड़ी समस्या होती है। ऐसे में सरकार का कहना है कि ब्याजमुक्त क्रेडिट के जरिए इसी शुरुआती परेशानी को कम किया जा सकता है। और यहीं से जुड़ता है लखपति दीदी और महिला स्वावलंबन का बड़ा लक्ष्य। यानी पैसा सिर्फ खाते में पहुंचाना नहीं...बल्कि महिला को कमाई का जरिया खड़ा करने में मदद करना भी है।
लेकिन इस पूरी कहानी का एक राजनीतिक पहलू भी है। 2027 में यूपी का चुनाव होना है। और चुनाव से पहले हर पार्टी की नजर महिला वोटरों पर है। बीजेपी के लिए महिला वोट पहले से महत्वपूर्ण रहा है, जबकि समाजवादी पार्टी भी महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। जी हां इस चुनावी चक्रव्यूह में समाजवादी पार्टी भी चुप नहीं बैठी है। अखिलेश यादव अच्छी तरह जानते हैं कि अगर 2027 में सत्ता तक पहुँचना है तो महिला वोटर्स की इस दीवार में सेंध लगानी ही होगी। यही वजह है कि पार्टी ने सांसद डिंपल यादव को आगे कर महिलाओं के बीच संवाद बढ़ा दिया है, जो महंगाई, रसोई के बजट और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार को घेरने की जुगत में हैं। लेकिन, सपा के इस भावनात्मक और राजनीतिक वार के सामने योगी सरकार का यह एक लाख रुपये का आर्थिक पैकेज एक ऐसा ब्रह्मास्त्र साबित हो रहा है, जिसका काट ढूंढना विपक्ष के लिए लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है।
आपको बता दें कुछ समय पहले बिहार विधानसभा चुनाव में 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' ने पूरे चुनाव की काया पलट दी थी। महिलाओं को सीधे आर्थिक मदद मिलने से जो सोशल इंजीनियरिंग बनी, उसने नतीजों में चमत्कार कर दिखाया। उसी मॉडल को अब उत्तर प्रदेश की ज़मीन पर उतारा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी साफ कह चुके हैं कि जब तक आधी आबादी घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होगी, तब तक राज्य का विकास अधूरा है। हालांकि आपको बता दें उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण अभी भी बेहद अहम हैं। लेकिन अगर महिला वोटर बड़ी संख्या में किसी मुद्दे या योजना से प्रभावित होती हैं, तो इसका असर अलग-अलग जातीय समूहों में भी दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि चुनाव से पहले महिला केंद्रित योजनाओं को लेकर सियासी बहस बढ़ रही है। एक तरफ सुरक्षा का मुद्दा...दूसरी तरफ आर्थिक मदद और रोजगार का सवाल...और तीसरी तरफ विपक्ष की अपनी रणनीति। यानी 2027 की लड़ाई में महिला वोटर सिर्फ एक वोट बैंक नहीं, बल्कि चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बनती दिखाई दे रही हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश की राजनीति अब जातीय समीकरणों की पुरानी सीमाओं को तोड़कर विकास, सुरक्षा और सीधे आर्थिक सशक्तिकरण के नए पायदान पर खड़ी है। दिसंबर के महीने में जब इन 1 करोड़ महिलाओं के खातों में पहली किस्त के रूप में हजारों रुपये गिरने शुरू होंगे, तो यह सिर्फ बैंक खातों में आने वाला पैसा नहीं होगा, बल्कि यह यूपी के चुनावी समर में एक ऐसा बदलाव लाएगा जो किसी भी दल की किस्मत पलटने का पूरा माद्दा रखता है। विपक्ष के तमाम वादों और दावों के बीच, योगी सरकार का यह आत्मनिर्भरता मॉडल ज़मीन पर क्या रंग दिखाता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि 2027 के सिंहासन की चाबी अबकी बार सूबे की इन्हीं मजबूत महिलाओं के हाथों में है।
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