अखिलेश की 'साइकिल' पर ब्रेक लगाने मैदान में उतरे योगी-मोदी

उत्तर प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव का बिगुल आधिकारिक तौर पर न बजा हो, लेकिन सियासी बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है! और इस बार, सत्ता के सेमीफाइनल का सबसे बड़ा अखाड़ा बना है ताला और तालीम की नगरी..अलीगढ़। जी हां, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कमान संभालते हुए अलीगढ़ से मिशन-2027 का ऐसा शंखनाद करने जा रहे हैं, जिसकी गूंज पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र में सुनाई देगी। आज सोमवार से शुरू हो रहा सीएम योगी का यह 18 घंटे का तूफानी दौरा सिर्फ फीता काटने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह अखिलेश यादव के साइकिल की रफ्तार पर ब्रेक लगाने और बीजेपी के किले को और मजबूत करने का महा-प्लान है। इसके ठीक बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसी रणभूमि में उतरने वाले हैं। यानी, योगी-मोदी की जोड़ी उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में पूरे दमखम के साथ उतरने को बेताब है! देखिए पूरी रिपोर्ट...

सियासत की समझ रखने वाले एक बात बहुत अच्छे से जानते हैं कि किसी गढ़ को जीतना जितना मुश्किल होता है, उस जीत को बरकरार रखना उससे कहीं ज्यादा टेढ़ी खीर होती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अलीगढ़ जिले की सभी 7 सीटों पर जीत हासिल करते हुए विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था। वहीं पड़ोसी जिले हाथरस की 3 सीटों में से 2 पर बीजेपी और 1 पर उसकी सहयोगी पार्टी RLD ने परचम लहराया था। वहीं आज की तारीख में अलीगढ़ और हाथरस की सभी 10 विधानसभा सीटों पर बीजेपी गठबंधन का पूरी तरह कब्जा है। दोनों लोकसभा सीटें भी बीजेपी की जेब में हैं और सूबे की सरकार में दो-दो मंत्रियों के साथ इस क्षेत्र का दबदबा लखनऊ तक कायम है। ऐसे में सीएम योगी का यह दौरा किसी भी तरह की सत्ता विरोधी लहर को पनपने से पहले ही कुचल देने की एक बड़ी कोशिश है। वह जमीन पर उतरकर यह तय करना चाहते हैं कि 2027 तक पार्टी का यह अटूट दबदबा यूं ही बरकरार रहे। 

आपको बता दें सीएम योगी आदित्यनाथ आज सोमवार और कल मंगलवार यानी दो दिन के दौरे पर हैं। इस दौरान अलीगढ़ को करीब 500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात मिलने जा रही है। इसमें चमचमाती सड़कें, नाले, आधुनिक अस्पताल, गो संरक्षण केंद्र और सरकारी भवन शामिल हैं। सीएम योगी खुद विश्वविद्यालय का निरीक्षण करेंगे, विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे और जनप्रतिनिधियों के साथ मैराथन बैठकें करेंगे। इसके ठीक बाद, जुलाई-अगस्त के महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अलीगढ़ दौरा प्रस्तावित है। पीएम मोदी उन बड़ी परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे, जिनकी आधारशिला उन्होंने खुद साल 2021 में रखी थी। इसमें शामिल हैं:

राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय
बारहद्वारी में मल्टीस्टोरी पार्किंग और शानदार शॉपिंग कॉम्प्लेक्स
नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

दरअसल, साल 2021 में जिस काम का शिलान्यास हुआ, 2026 में उसका लोकार्पण करके बीजेपी जनता के बीच यह कड़ा संदेश देना चाहती है कि उनके राज में काम केवल कागजों पर नहीं होता, बल्कि समय सीमा के भीतर जमीन पर उतरता है। वहीं दूसरी तरफ इस 18 घंटे के दौरे ने अलीगढ़ और हाथरस के मौजूदा विधायकों और नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। वजह साफ है कि सीएम योगी सिर्फ मंच से भाषण नहीं देंगे, बल्कि वह संगठन के कार्यकर्ताओं और जनता के बीच जाकर सीधा फीडबैक  लेंगे। वह खुद टटोलेंगे कि:

किस विधानसभा क्षेत्र में जनता का मूड क्या है?
कौन सा विधायक जनता की उम्मीदों पर खरा उतरा और किसकी छवि कमजोर हुई है?
जनता किस जनप्रतिनिधि की कार्यशैली से खुश है और किससे नाराज?

वहीं सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि मुख्यमंत्री की डायरी में जो फीडबैक दर्ज होगा, वही तय करेगा कि 2027 में किसका टिकट पक्का होगा और किसका पत्ता कटेगा! इसके अलावा, सीएम योगी बीजेपी के मंडल जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर लोक निर्माण विभाग की वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना को भी हरी झंडी दिखाएंगे। दरअसल, साल 2017 से ही यह पूरा इलाका बीजेपी का अभेद्य किला बना हुआ है, लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव लगातार इस किले में सेंध लगाने की ताक में बैठे हैं। पश्चिमी यूपी और ब्रज की राजनीति में अपने समीकरणों को दुरुस्त रखने के लिए बीजेपी ने विकास, भारी-भरकम निवेश और कड़क कानून-व्यवस्था को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है। आज अलीगढ़ की विशाल जनसभा के बाद, कल मंगलवार को सीएम योगी हाथरस और फिरोजाबाद की रैलियों में हुंकार भरेंगे और विपक्ष के हर सियासी तीर को कुंद करने का एजेंडा सेट करेंगे।

तो कुल मिलाकर साफ है कि अलीगढ़ अब सिर्फ तालों के निर्यात या यूनिवर्सिटी की तालीम के लिए नहीं जाना जाएगा, बल्कि यह 2027 के महासंग्राम का वह लॉन्चिंग पैड बन चुका है जहां से उठी सियासी चिंगारी पूरे उत्तर प्रदेश के माहौल को गरमाने वाली है। एक तरफ अखिलेश यादव की घेराबंदी है, तो दूसरी तरफ खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी कमान संभालकर यह साफ कर दिया है कि बीजेपी अपने इस सबसे मजबूत गढ़ को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। अब देखना यह होगा कि योगी का यह फीडबैक और मोदी का आने वाला लोकार्पण पश्चिमी यूपी की राजनीति में क्या नया रंग खिलाता है, लेकिन फिलहाल तो यूपी की सियासत में पिक्चर अभी बाकी है और माहौल पूरी तरह तड़कता-भड़कता हो चुका है! 

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