योगी ने गिनाया आजादी का असली मतलब, देश को बांटने वाली ताकतों से किया सावधान
देशभर में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्साह और देशभक्ति का माहौल है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित ऐतिहासिक विधान भवन में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह गरिमापूर्ण तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ध्वजारोहण किया और प्रदेशवासियों सहित देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।
अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी केवल विदेशी शासन से राजनीतिक मुक्ति तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि अराजकता, पिछड़ेपन, गरीबी, अशिक्षा और असमानता से मुक्ति भी वास्तविक आजादी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से लड़ना अब देश की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन में उत्तर प्रदेश की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यूपी के बिना देश की आजादी की लड़ाई पूरी नहीं हो सकती थी। उन्होंने कहा कि आजादी का बिगुल यूपी की धरती से बजा था। अपने संबोधन में उन्होंने चौरी-चौरा कांड और लखनऊ के काकोरी ट्रेन एक्शन का भी उल्लेख किया और स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को याद किया।
सीएम योगी ने देश की मौजूदा उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में गरीबी के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ी गई है। उन्होंने दावा किया कि देश में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का दायरा बढ़ा है और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज देश की चार प्रमुख जातियां हैं गरीब, युवा, महिला और अन्नदाता किसान। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं के केंद्र में यही चार वर्ग हैं और उन्हें सशक्त बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने देशवासियों को देश को बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जब देश तेजी से विकास की ओर बढ़ता है, तब सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाने वाली शक्तियां सक्रिय हो सकती हैं। ऐसे में नागरिकों को भ्रम से बचते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा।
अपने संबोधन के अंत में सीएम योगी ने स्वतंत्रता संग्राम के ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे वीर जवानों को भी नमन किया और कहा कि आज का दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि उन बलिदानियों के प्रति अपना ऋण याद करने का भी दिन है।
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