पिता की अंतिम यात्रा में गूंजे ढोल-नगाड़े, बेटे के फैसले ने जीता लोगों का दिल
किसी के निधन के बाद आमतौर पर घर से निकलने वाली अंतिम यात्रा में गम और खामोशी का माहौल नजर आता है। लेकिन बिहार के पश्चिम चंपारण में एक बुजुर्ग की अंतिम विदाई का अंदाज बिल्कुल अलग देखने को मिला। यहां शवयात्रा के दौरान ढोल-नगाड़ों के साथ गाजे-बाजे बजाए गए और आर्केस्ट्रा डांसर भी प्रस्तुति देते नजर आए। इस दौरान सड़क के किनारे लोगों की भीड़ जुट गई और कई लोगों ने इसका वीडियो बना लिया।
मामला नौतन प्रखंड के डबरिया मकरीटोला गांव का बताया जा रहा है। यहां रहने वाले बुजुर्ग छठु पटेल का निधन हो गया था। रविवार को जब परिवार और ग्रामीण उनकी अंतिम यात्रा लेकर निकले तो रास्ते में मौजूद लोगों को कुछ ऐसा देखने को मिला, जिसकी उन्होंने शायद उम्मीद नहीं की थी।
ढोल-नगाड़ों के बीच निकली अंतिम यात्रा
छठु पटेल की शवयात्रा में आगे-आगे ढोल और अन्य वाद्य यंत्र बजाए जा रहे थे। वहीं, यात्रा के साथ आर्केस्ट्रा के कलाकार भी मौजूद थे। डांसरों की प्रस्तुति और तेज संगीत के कारण यह अंतिम यात्रा इलाके में चर्चा का केंद्र बन गई।
रास्ते से गुजर रही इस यात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। किसी ने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड किया तो किसी ने मौके की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर दीं। इसके बाद यह वीडियो तेजी से लोगों के बीच वायरल होने लगा।
बेटे ने बताई पिता की आखिरी इच्छा
इस पूरे मामले को लेकर मृतक के बेटे मुकेश पटेल ने जो वजह बताई, वह इस अंतिम यात्रा को और खास बना देती है। उनके मुताबिक, उनके पिता छठु पटेल जीवन में कई बार अपनी आखिरी इच्छा के बारे में परिवार से बात किया करते थे।
मुकेश ने बताया कि पिता चाहते थे कि उनके निधन के बाद परिवार लंबे समय तक शोक में डूबने के बजाय उन्हें खुशी के माहौल में विदाई दे। उनकी इच्छा थी कि अंतिम यात्रा को किसी उत्सव की तरह निकाला जाए और रोने-धोने के बजाय उनके जीवन को याद करते हुए उन्हें सम्मानपूर्वक विदा किया जाए।
अनोखी विदाई पर लोगों की अलग-अलग राय
अंतिम यात्रा के इस अंदाज को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मृत्यु के बाद इस तरह जश्न मनाना सामाजिक और पारंपरिक मान्यताओं से अलग है। वहीं, कुछ लोग इसे मृतक की इच्छा का सम्मान मान रहे हैं।
लोगों का एक वर्ग यह भी कह रहा है कि किसी व्यक्ति ने जीवन रहते अपनी अंतिम विदाई को लेकर जो इच्छा जताई हो, उसे पूरा करना परिवार के लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल ढोल-नगाड़ों और आर्केस्ट्रा के साथ निकली यह अंतिम यात्रा इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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