Karachi के इस मजार में रहता है मगरमच्छों का खानदान, खाता है मिठाइयां, बाबा फरीद के जुओं से है रिश्ता

BY- ANJALI SHUKLA

सोशल मीडिया पर इन दिनों पाकिस्तान के कराची स्थित मंगोपिर मजार की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जहां एक झील में 200 से अधिक मगरमच्छ रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि ये मगरमच्छ बेहद शांत माने जाते हैं और श्रद्धालु इन्हें हाथों से मिठाई, मांस, अंडे और चावल खिलाते हैं। मान्यता है कि इनमें से कई मगरमच्छ 100 साल से भी अधिक पुराने हैं और इन्हें ‘बाबा फरीद के जूं’ से जोड़कर देखा जाता है।

यह दरगाह 13वीं सदी के सूफी संत पीर मंगो, जिन्हें साकी सुल्तान भी कहा जाता है, से जुड़ी है। पीर मंगो, महान सूफी संत बाबा फरीद गंज शकर के शिष्य थे। लोककथाओं के अनुसार, पीर मंगो पहले मंगो वासा नामक एक डाकू थे, जो बाबा फरीद की आध्यात्मिक शक्ति से प्रभावित होकर इस्लाम स्वीकार कर सूफी बन गए। बाबा फरीद ने उन्हें मंगोपिर क्षेत्र में सूफी मत के प्रचार के लिए भेजा।

मगरमच्छों को लेकर कई रोचक कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, बाबा फरीद की जुएं चमत्कारिक रूप से झील में गिरकर मगरमच्छ बन गईं, जिन्हें पीर मंगो के शिष्य और दरगाह का रक्षक माना जाता है। एक अन्य कथा में लाल शाहबाज कलंदर का उल्लेख मिलता है, जिनसे इस स्थान पर गर्म पानी के झरनों और मगरमच्छों का संबंध जोड़ा जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, ये वास्तव में मार्श क्रोकोडाइल्स (Crocodylus palustris) हैं, जो पाकिस्तान में विलुप्ति के कगार पर हैं, लेकिन मंगोपिर में सुरक्षित हैं।

आज भी दूर-दूर से श्रद्धालु यहां फतेहा पढ़ने आते हैं और मगरमच्छों को ‘मुबारक’ मानकर भोजन चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि यदि मगरमच्छ भेंट स्वीकार कर ले, तो मनोकामना जरूर पूरी होती है। यही आस्था और रहस्य मंगोपिर मजार को दुनिया की सबसे अनोखी धार्मिक जगहों में शामिल करता है।

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