भारत में ₹40 की कछुआ छाप, पेरिस में ₹14,000! कीमत सुनकर आप भी कहेंगे—मच्छर खुद ही मार लेते हैं
भारत में जिस मच्छर कॉयल को लोग कुछ दर्जन रुपये में खरीदते हैं, वही विदेश में हजारों रुपये की कीमत पर बिकने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल है। आखिर मामला क्या है?
भारत में मच्छरों से बचने के लिए कॉयल का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। खासकर छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में यह आज भी घरों की रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा है। इनमें कछुआ छाप कॉयल का नाम सबसे ज्यादा पहचाना जाता है।
भारत में यह कॉयल आमतौर पर बेहद सस्ती मिलती है। लेकिन सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इसी तरह की कछुआ छाप कॉयल को पेरिस जैसे विदेशी बाजार में करीब ₹14 हजार तक की कीमत पर बेचा जा रहा है। यह दावा सुनकर लोगों का हैरान होना लाजिमी है।
आखिर इतनी महंगी क्यों?
यहां थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। विदेश में किसी प्रोडक्ट की कीमत ज्यादा दिखने का मतलब यह जरूरी नहीं कि उसकी असली कीमत भी इतनी ही हो। दूसरे देश में पहुंचने तक शिपिंग, पैकेजिंग, टैक्स, इंपोर्ट ड्यूटी, स्टोरेज और विक्रेता का मुनाफा जैसे कई खर्च जुड़ जाते हैं।
कुछ वायरल पोस्ट में इसे “scented mosquito coil” यानी खुशबू वाली मच्छर कॉयल के तौर पर दिखाया गया है। ऐसे में संभव है कि इसे सामान्य भारतीय कॉयल की तरह नहीं, बल्कि एक अलग प्रोडक्ट के रूप में बेचा जा रहा हो।
कछुआ छाप इतनी पॉपुलर क्यों है?
कछुआ छाप कॉयल भारत में दशकों से लोगों के बीच जानी-पहचानी है। इसकी बड़ी वजह है—कम कीमत, आसान उपलब्धता और लंबे समय से इस्तेमाल। किराना दुकानों से लेकर छोटे जनरल स्टोर तक, यह आसानी से मिल जाती है।
तो अगली बार अगर सोशल मीडिया पर ₹14 हजार वाली कॉयल की पोस्ट दिखे, तो सिर्फ कीमत देखकर चौंकने के बजाय यह भी समझें कि विदेशी बाजार में कीमत तय होने के पीछे पूरी सप्लाई चेन काम करती है।
भारत की सस्ती कॉयल का विदेश में महंगा बिकना दिलचस्प जरूर है, लेकिन वायरल कीमत को बिना जांचे पूरी सच्चाई मान लेना सही नहीं होगा।
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