“यदि ‘तृतीय रत्न’ प्रकाशित हुआ होता, तो ढोंगी बाबाओं की उत्पत्ति ही नहीं होती”: दीपकभाई केदार
अहिल्यानगर : “एक ओर देश विज्ञान के युग में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर ढोंगी बाबाओं द्वारा महिलाओं को ठगा जाना शर्मनाक है। यदि राज्य सरकार ने महात्मा फुले का ‘तृतीय रत्न’ नाटक प्रकाशित किया होता, तो खरात जैसे ढोंगी बाबाओं की उत्पत्ति ही नहीं होती,” ऐसे शब्दों में ऑल इंडिया पैंथर सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपकभाई केदार ने सरकार की आलोचना की।
वे श्रीगोंदा के शेख महमंद महाराज पटांगण में आयोजित महात्मा फुले, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और संत गाडगेबाबा की संयुक्त जयंती समारोह के अवसर पर बोल रहे थे।
केदार ने आधुनिक समय में फैली अंधश्रद्धा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मीडिया के माध्यम से ढोंगी बाबाओं का महिमामंडन कर आम लोगों को गुमराह किया जा रहा है। “मानवीय मूल्य और मानवता को बनाए रखना ही आज की सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार को तुरंत ‘तृतीय रत्न’ नाटक प्रकाशित कर वैचारिक जागरूकता फैलानी चाहिए,” उन्होंने यह मांग भी की।
देश की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए दीपकभाई केदार ने आदिवासियों और दलितों पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “एक बकरी के लिए आदिवासी की हत्या कर दी जाती है, यह जातिवाद की पराकाष्ठा है। विपक्ष द्वारा सामाजिक एकता को तोड़ने की साजिश रची जा रही है, इसलिए बहुजन समाज को सतर्क रहना चाहिए।”
इस दौरान उन्होंने स्थानीय नेताओं की दोहरी भूमिका पर भी कड़ा प्रहार किया। ‘महामानव विचार प्रबोधन यात्रा’ के अवसर पर श्रीगोंदा शहर और तालुका के नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम में कोरोना वैक्सीन के कथित दुष्परिणाम और महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
जनप्रतिनिधियों द्वारा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती पर शुभकामनाएं देते समय “पुण्यतिथि” शब्द का गलत उल्लेख किए जाने पर दीपकभाई केदार ने तीव्र विरोध दर्ज किया।
इस कार्यक्रम में सावित्री-फातिमा सद्भावना विचार मंच, फुले-शाहू-आंबेडकर विचार मंच, ऑल इंडिया पैंथर सेना, अपंग दिव्यांग संगठन के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
रिपोर्टर : अमर घोडके


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