आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कर दिया चैलेंज
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया बवाल तब मच गया जब हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में एक बयान देते हुए समाजवादी पार्टी के शासनकाल को लेकर गंभीर आरोप लगाए। दरअसल यूपी विधानसभा में शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव की सपा सरकार पर जमकर हमला बोला था। सीएम योगी ने कहा था कि , "2017 से पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की स्थिति क्या थी? कौन नहीं जानता कि क्या होता था। आप लोग भूल गए, जब 86 एसडीएम पद में से 56 एक ही जाति विशेष के लोग भर दिए गए।"
यह बयान जैसे ही सदन में आया, सियासी गलियारों में हलचल मच गई और अब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र यादव ने योगी को खुली चुनौती दे डाली। उनका कहना है -
"भारतीय जनता पार्टी लगातार अखिलेश यादव के कार्यकाल को बदनाम करने की कोशिश करती रहती है। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि सदन के अंदर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 56 एसडीएम को लेकर जो झूठ बोला है, मैं चैलेंज करता हूं साबित कर दें। साबित कर देते हैं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। और न कर पाएं तो वो राजनीति छोड़ दें।"
अब इस बयान के बाद स्थिति और भी गरम हो गई। दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की 2011 की परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें भर्तियों में धांधलियों के आरोप लगे थे। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में यूपी PSC में यादव जाति के अभ्यर्थियों को ज्यादा मौका देने की बात उठी थी। अब सवाल उठता है कि क्या योगी आदित्यनाथ के बयान में सच्चाई है कि 86 एसडीएम पद में से 56 एक ही जाति विशेष के लोग भर दिए गए थे .
अब सच्चाई की परतों को समझने के लिए हमें पीछे मुड़कर देखना होगा। 2011 में यूपी लोक सेवा आयोग की परीक्षा में व्यापक धांधलियों की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय बीजेपी के नेता केसरीनाथ त्रिपाठी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इस मामले को उठाया था। आरोप था कि परीक्षा में यादव जाति के अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दिया गया। खासकर यूपीPSC के सचिव अनिल कुमार यादव पर इन भर्तियों में धांधली करने के आरोप लगे थे। एक प्रमुख मीडिया चैनल ने इस मुद्दे की गहरी छानबीन की थी और करीब चार महीने तक तथ्यों को जुटाने के बाद यह खबर सामने आई, जिससे प्रदेशभर में भूचाल आ गया था। रिपोर्ट पब्लिक डोमेन में है और गूगल सर्च में ढूंढने पर मिल जाती है.हालांकि, सपा सरकार ने इस रिपोर्ट को न तो खंडित किया, न ही इसे चुनौती दी।
इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि
- यूपीPSC की 2011 की परीक्षा में कुल 389 सफल अभ्यर्थी थे
- इनमें से 86 ओबीसी श्रेणी के थे, जिनमें से करीब 50 यादव जाति के थे
- सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ओबीसी वर्ग के उन छात्रों को इंटरव्यू में 200 में से 135-140 अंक मिले
- जबकि सामान्य जाति के छात्रों को 115 अंक मिले
- इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि यादव जाति के अभ्यर्थियों को स्केलिंग प्रक्रिया में अधिक अंक मिले थे
कुल मिलाकर, यह विवाद इस बात पर केंद्रित था कि क्या वाकई 86 में से 56 एसडीएम यादव जाति के थे? रिपोर्ट में कहीं भी यह दावा नहीं किया गया था कि 86 में से 56 एसडीएम यादव जाति के थे, लेकिन सियासी चर्चाओं में यह बात इसी तरह से सामने आई .मगर इसमें सच्चाई नहीं थी ... तो समाजवादी पार्टी ने पहले इस बात का खंडन क्यों नहीं किया था .. ये भी बड़ा सवाल है ..
फिलहाल यह मामला उत्तर प्रदेश में राजनीति के खेल को और भी दिलचस्प बना गया है। एक ओर जहां धर्मेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री योगी को चुनौती दी है, वहीं दूसरी ओर इस पूरे विवाद ने यूपी की राजनीति में जातिवाद और भर्तियों की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इसमें जीत किसकी होगी , ये देखना दिलचस्प होगा
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