चिखलोली बांध से जल चोरी के आरोप, टैंकर नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच की मांग

अंबरनाथ : महाराष्ट्र के अंबरनाथ स्थित चिखलोली बांध से कथित तौर पर अनधिकृत रूप से पानी निकालने, निजी टैंकरों के माध्यम से औद्योगिक कंपनियों को पानी की आपूर्ति करने, इसके पीछे संभावित आर्थिक लेन-देन और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर उठे सवालों से अब एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा होने की संभावना है।

सार्वजनिक जलसंपदा का उपयोग आखिर किसकी अनुमति से किया जा रहा है? यदि बांध का पानी निजी टैंकरों के माध्यम से औद्योगिक कंपनियों तक पहुंचाया जा रहा है, तो उसका आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है? इस जलापूर्ति से जुड़े आर्थिक लेन-देन और GST रिकॉर्ड पारदर्शी हैं या नहीं? ऐसे कई गंभीर सवाल सामने आए हैं।

इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं बहुविभागीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग वरिष्ठ पत्रकार तथा Sprouts News के वरिष्ठ प्रतिनिधि सुधीर शरद गुजर ने की है।

इस संबंध में उन्होंने 2 नवंबर 2026 को ठाणे जिलाधिकारी, पुलिस प्रशासन, सिंचाई विभाग, MIDC, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, FSSAI, केंद्रीय GST और महाराष्ट्र राज्य GST विभाग सहित विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों को विस्तृत शिकायत भेजी है।

विशेष रूप से, महाराष्ट्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तुकाराम मुंढे के समक्ष भी इस मामले की शिकायत कर उनके स्तर से हस्तक्षेप और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।

MIDC के RTI जवाब से उठे गंभीर सवाल

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत MIDC प्रशासन से प्राप्त जवाब है।

सुधीर गुजर ने 8 जून 2026 को MIDC प्रशासन के समक्ष RTI आवेदन दाखिल किया था। इसके जवाब में अतिरिक्त अंबरनाथ MIDC के उपअभियंता द्वारा 19 जून 2026 को दिए गए उत्तर के अनुसार, मेसर्स Cloud 9 Beverages कंपनी को बाहरी निजी टैंकरों के माध्यम से पानी लाने के लिए MIDC की ओर से कोई आधिकारिक अनुमति अथवा NOC जारी किए जाने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है।

इसके अलावा, कंपनी को बाहरी स्रोत से कितना पानी इस्तेमाल करने की आधिकारिक अनुमति है, इस संबंध में भी कोई आदेश अथवा प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।

इसके अतिरिक्त MIDC प्रशासन ने:

- 2 जून 2026 को मेसर्स Cloud 9 Beverages को नोटिस जारी किया था।
- 5 जून 2026 को संबंधित कंपनी को रिमाइंडर भेजा गया था।

लेकिन इन नोटिसों के बाद कंपनी ने क्या जवाब दिया? क्या कंपनी ने पानी का आधिकारिक स्रोत स्पष्ट किया? क्या मौके पर निरीक्षण किया गया? इसके बाद प्रशासन ने क्या कार्रवाई की? इन सवालों का स्पष्ट होना अभी बाकी है।

महत्वपूर्ण बात: MIDC के RTI जवाब में उपलब्ध जानकारी Cloud 9 Beverages से संबंधित है। इन निष्कर्षों को सीधे Bisleri कंपनी पर लागू नहीं किया जा सकता। Bisleri से संबंधित जलापूर्ति स्रोतों, अनुमतियों और व्यावसायिक लेन-देन की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

चिखलोली बांध से पानी निकालने की अनुमति आखिर किसके पास?

चिखलोली बांध सार्वजनिक जलसंपदा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण जलस्रोत है। ऐसे जलस्रोत से व्यावसायिक अथवा औद्योगिक उद्देश्यों के लिए पानी निकालने हेतु संबंधित जलसंपदा या सिंचाई प्राधिकरण की वैध अनुमति, स्वीकृत जल आवंटन और निर्धारित शर्तों का पालन आवश्यक है।

हालांकि, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बांध परिसर से निजी टैंकरों के माध्यम से पानी निकालकर औद्योगिक कंपनियों को आपूर्ति किए जाने की आशंका है। इसकी वास्तविकता जानने के लिए मौके पर निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।

इससे प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं:

1. चिखलोली बांध से पानी निकालने की आधिकारिक अनुमति किसे दी गई है?
2. पानी निकालने के लिए लिखित आदेश, NOC अथवा जल आवंटन की मंजूरी उपलब्ध है?
3. प्रतिदिन कितना पानी निकाला जाता है और इसका रिकॉर्ड किस सरकारी कार्यालय में रखा जाता है?
4. क्या बांध परिसर में अनधिकृत पंप, मोटर, पाइपलाइन अथवा सक्शन सिस्टम लगाया गया है?
5. क्या सार्वजनिक बांध का पानी निजी टैंकरों के माध्यम से व्यावसायिक कंपनियों को बेचने की आधिकारिक अनुमति है?
6. क्या ऐसे लेन-देन से स्थानीय नागरिकों की जलापूर्ति अथवा सार्वजनिक जल भंडार पर असर पड़ रहा है?

इन सभी सवालों के जवाब प्रत्यक्ष निरीक्षण, सरकारी रिकॉर्ड और जल आवंटन संबंधी दस्तावेजों की जांच के आधार पर देने की मांग की गई है।

टैंकर माफिया का कथित नेटवर्क; पूरी सप्लाई चेन की जांच की मांग

इस मामले में केवल पानी निकालने वाले व्यक्तियों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। बांध से औद्योगिक कंपनियों तक पहुंचने वाली पूरी जलापूर्ति श्रृंखला की जांच जरूरी है। ऐसा सुधीर गुजर ने अपनी शिकायत में कहा है।

पानी निकालने वाले व्यक्तियों, टैंकर मालिकों, चालकों, जलापूर्ति करने वालों, बिचौलियों, दलालों और पानी खरीदने वाली कंपनियों की भूमिका अलग-अलग निर्धारित करने की मांग की गई है।

प्रत्येक टैंकर का रजिस्ट्रेशन नंबर, वाहन मालिक, चालक, टैंकर की क्षमता, प्रतिदिन के चक्कर, बांध परिसर में प्रवेश एवं निकास का रिकॉर्ड और संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में टैंकरों के प्रवेश की जानकारी की जांच की जानी चाहिए।

इसके अलावा टैंकरों से आपूर्ति किए जाने वाले पानी की वास्तविक मात्रा, पानी की बिक्री दर, प्रति टैंकर वसूली जाने वाली रकम, बिल, रसीदें और संबंधित आर्थिक लेन-देन की भी जांच करने की मांग की गई है।

Cloud 9 Beverages और Bisleri की जलापूर्ति की स्वतंत्र जांच हो

अतिरिक्त अंबरनाथ MIDC स्थित प्लॉट नंबर K-29 पर मौजूद मेसर्स Cloud 9 Beverages (मेसर्स लवाडी फैब्रिका) तथा Bisleri कंपनी से संबंधित जलापूर्ति लेन-देन की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

दोनों कंपनियों के संबंध में निम्नलिखित बिंदुओं की जांच की मांग की गई है:

- उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पानी का मूल स्रोत क्या है?
- पानी MIDC, महानगरपालिका, सिंचाई विभाग अथवा निजी टैंकरों से प्राप्त किया जाता है?
- यदि निजी टैंकरों से पानी लिया जाता है, तो आपूर्तिकर्ता कौन हैं?
- संबंधित जलापूर्ति करने वालों के पास वैध अनुमति और NOC है?
- कंपनी और जलापूर्ति करने वालों के बीच लिखित समझौते हैं?
- पानी खरीदने के बिल और रसीदें नियमित रूप से जारी की जाती हैं?
- कंपनी के जल उपयोग रजिस्टर में टैंकर से आए पानी का रिकॉर्ड है?
- उत्पादन में इस्तेमाल किए गए पानी की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट उपलब्ध है?
- पानी खरीदने पर हुए खर्च का उल्लेख कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड में किस प्रकार किया गया है?

विशेष रूप से दोनों कंपनियों के लेन-देन को आपस में मिलाए बिना स्वतंत्र रूप से जांच करने की मांग की गई है।

FSSAI लाइसेंस रद्द करने की मांग; केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं!

पेय पदार्थों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला पानी सीधे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा है। इसलिए इस मामले का खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व है।

सुधीर गुजर ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा FSSAI से संबंधित उत्पादन केंद्रों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने की मांग की है।

कच्चे पानी, शुद्धिकरण के बाद के पानी और तैयार पेय पदार्थों के आधिकारिक नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराई जानी चाहिए। पानी में मौजूद रासायनिक, जैविक और सूक्ष्मजीव संबंधी तत्वों की भी जांच होनी चाहिए।

इसके अलावा पानी शुद्ध करने की मशीनरी, फिल्ट्रेशन, डिसइन्फेक्शन प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की मांग की गई है।

संबंधित कंपनियों के निम्नलिखित दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए:

- FSSAI लाइसेंस और लाइसेंस नंबर।
- उत्पादन केंद्रों के स्वीकृत पते।
- उत्पादन श्रेणी और लाइसेंस की शर्तें।
- पानी की गुणवत्ता संबंधी प्रमाणपत्र।
- प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट।
- गुणवत्ता नियंत्रण रजिस्टर।
- उत्पादन एवं वितरण संबंधी रिकॉर्ड।

सुधीर गुजर की स्पष्ट मांग है कि यदि खाद्य सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन, हानिकारक पानी का इस्तेमाल अथवा लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन जांच में साबित होता है, तो केवल अस्थायी निलंबन करके मामला लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। कानूनी प्रक्रिया पूरी करके संबंधित उत्पादन केंद्रों के FSSAI लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए।

यदि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को खतरा पाया जाता है, तो सक्षम प्राधिकरण कानून के अनुसार संबंधित उत्पादों के उत्पादन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई करे।

GST लेन-देन की जांच; पानी की बिक्री से कितनी आर्थिक उलाढाल?

शिकायत में कहा गया है कि यदि पानी की व्यावसायिक आपूर्ति की जा रही है, तो उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की भी जांच जरूरी है।

केंद्रीय GST और महाराष्ट्र राज्य GST विभाग से निम्नलिखित बिंदुओं की जांच करने की मांग की गई है:

1. क्या जलापूर्ति करने वालों का GST रजिस्ट्रेशन है?
2. क्या पानी की बिक्री के लिए आधिकारिक GST इनवॉइस जारी किए गए हैं?
3. क्या संबंधित लेन-देन GST रिटर्न में दर्शाए गए हैं?
4. क्या पानी खरीदने वाली कंपनियों के अकाउंटिंग रिकॉर्ड और आपूर्तिकर्ताओं के बिक्री रिकॉर्ड आपस में मेल खाते हैं?
5. क्या वास्तविक टैंकर आपूर्ति, GST इनवॉइस और जहां लागू हो, ई-वे बिल का मिलान किया गया है?
6. क्या फर्जी बिलिंग, गलत खरीद-बिक्री रिकॉर्ड अथवा गलत Input Tax Credit (ITC) लेने के प्रमाण हैं?
7. पानी की आपूर्ति के पूरे कारोबार से कितनी आर्थिक उलाढाल हुई है?

GST कानून के उल्लंघन अथवा कर चोरी के प्रमाण मिलने पर CGST Act, 2017 और महाराष्ट्र GST कानून के तहत संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

BNS 2023 के तहत आपराधिक कार्रवाई की मांग

शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की संबंधित धाराओं के तहत भी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

- धारा 303 – चोरी: सार्वजनिक जलस्रोत से आवश्यक अनुमति के बिना बेईमानी के इरादे से पानी निकालने के प्रमाण मिलने पर।
- धारा 61 – आपराधिक षड्यंत्र: पानी निकालने, परिवहन और बिक्री में मिलीभगत साबित होने पर।
- धारा 324 – संपत्ति को नुकसान: सार्वजनिक जलसंपदा को नुकसान पहुंचाने के आवश्यक कानूनी तत्व साबित होने पर।
- धारा 223 – लोक सेवक के विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा: कानूनी आदेश का जानबूझकर उल्लंघन साबित होने पर।
- धारा 274 और 275 – खाद्य या पेय पदार्थों में मिलावट तथा हानिकारक खाद्य या पेय की बिक्री: संबंधित अपराधों के आवश्यक तत्व जांच में साबित होने पर।

हालांकि, किसी भी धारा को लागू करने से पहले जांच में आवश्यक कानूनी तत्वों और सबूतों का स्थापित होना जरूरी है।

सबूत नष्ट होने से पहले CCTV और वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

इस मामले में महत्वपूर्ण सबूत नष्ट न हों और CCTV फुटेज स्वतः डिलीट न हो जाए, इसके लिए शिकायतकर्ता ने संबंधित रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की है।

इसमें चिखलोली बांध परिसर का CCTV फुटेज, टैंकरों के प्रवेश एवं निकास का रजिस्टर, पंपिंग रिकॉर्ड, टैंकरों के वाहन नंबर, संबंधित कंपनियों के प्रवेश द्वारों का CCTV फुटेज, पानी की खरीद-बिक्री के बिल, कंपनी का जल उपयोग रजिस्टर, आपूर्तिकर्ताओं के साथ हुए समझौते, MIDC के नोटिस और उनके जवाब, FSSAI निरीक्षण रिपोर्ट, प्रयोगशाला रिपोर्ट, GST इनवॉइस तथा संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

विशेष रूप से पिछले छह महीनों के उपलब्ध टैंकर परिवहन रिकॉर्ड और संबंधित कंपनियों में टैंकरों के प्रवेश की जानकारी की जांच करने की मांग भी की गई है।

संयुक्त उच्चस्तरीय जांच दल गठित करने की मांग

इस मामले में कई सरकारी विभागों का अधिकार क्षेत्र शामिल होने के कारण ठाणे जिलाधिकारी के समन्वय से संयुक्त उच्चस्तरीय जांच दल गठित करने की मांग सुधीर गुजर ने की है।

इस जांच दल में जिलाधिकारी कार्यालय, पुलिस प्रशासन, सिंचाई एवं जलसंपदा विभाग, MIDC, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, FSSAI, केंद्रीय GST और महाराष्ट्र राज्य GST विभाग के सक्षम अधिकारियों को शामिल किया जाना चाहिए।

यह जांच दल चिखलोली बांध से संबंधित औद्योगिक कंपनियों तक पहुंचने वाली पूरी जलापूर्ति श्रृंखला का प्रत्यक्ष निरीक्षण करे। अनुमति, पानी निकालने की मात्रा, पानी की गुणवत्ता, आर्थिक लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार करे, ऐसी मांग की गई है।

तुकाराम मुंढे के हस्तक्षेप पर नजर; प्रशासन क्या रुख अपनाएगा?

सार्वजनिक जलसंपदा के संभावित अनधिकृत इस्तेमाल, औद्योगिक जलापूर्ति में पारदर्शिता, खाद्य सुरक्षा और GST लेन-देन जैसे सभी मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण केवल एक विभाग की जांच पर्याप्त नहीं होगी, ऐसा शिकायतकर्ता का कहना है।

इसीलिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तुकाराम मुंढे से इस मामले का संज्ञान लेकर संबंधित विभागों के माध्यम से समन्वित जांच कराने की मांग की गई है।

अब MIDC प्रशासन ने पहले जारी किए गए नोटिसों के बाद क्या कार्रवाई की? सिंचाई विभाग के पास पानी निकालने की कौन-सी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है? क्या खाद्य एवं औषधि प्रशासन संबंधित उत्पादन केंद्रों का निरीक्षण करेगा? क्या GST विभाग आर्थिक लेन-देन की जांच करेगा? इन सभी सवालों पर नागरिकों की नजरें टिकी हैं।

सुधीर गुजर का सवाल : सार्वजनिक पानी आखिर किसकी संपत्ति?

इस पूरे मामले में सुधीर गुजर ने सार्वजनिक जलसंपदा के संरक्षण का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि बांध का पानी सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा है और किसी भी व्यक्ति या कंपनी को इसका नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

पानी निकालने की अनुमति, जलापूर्ति का स्रोत, आर्थिक लेन-देन और उत्पादन की गुणवत्ता के संबंध में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से केवल जांच की घोषणा करने के बजाय प्रत्यक्ष निरीक्षण, सबूतों का संकलन, स्वतंत्र प्रयोगशाला जांच और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल करके लिखित कार्रवाई रिपोर्ट देने की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चिखलोली बांध के पानी का इस्तेमाल आखिर किस आधिकारिक अनुमति के आधार पर किया जा रहा है? MIDC के RTI जवाब के बाद भी इन लेन-देन को लेकर स्पष्टता क्यों नहीं आई? और संबंधित सरकारी विभाग इस शिकायत पर वास्तव में क्या कार्रवाई करेंगे?

इन सभी सवालों के जवाब प्रशासन की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे


रिपोर्टर - साबिर शेख

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.