अरवल्ली के भिलोदा में आदिवासी पारंपरिक थाली शुरू आदिवासी हाट बाज़ार में आदिवासी महिलाओं की आर्थिक मज़बूती
अरवल्ली : भिलोदा के आदिवासी हाट बाज़ार में आदिवासी पारंपरिक थाली मिलने लगी है। इस बाज़ार में, आदिवासी महिलाएं अपने हाथ से बने प्रोडक्ट बेचकर अपनी और अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं। उन्होंने कोली भाजी, लापसी, मक्का देसी रोटाला और दाल-भात जैसी डिशेज़ के साथ पारंपरिक आदिवासी थाली बनाना शुरू कर दिया है।
यह पहल स्थानीय आदिवासी समुदाय की संस्कृति और स्वाद को बढ़ावा दे रही है। हाट बाज़ार में आने वाले लोग अब न सिर्फ़ हैंडीक्राफ्ट बल्कि इस पारंपरिक थाली का भी मज़ा ले सकते हैं। महिलाओं की यह कोशिश उनकी आर्थिक स्थिति को मज़बूत कर रही है और परिवार की ज़िंदगी में अच्छे बदलाव ला रही है।
भिलोदा के इस हाट बाज़ार में, आदिवासी महिलाओं की कड़ी मेहनत और हुनर से पारंपरिक खाना और हैंडीक्राफ्ट दोनों को बचाया जा रहा है। इस तरह की कोशिशों से आदिवासी समुदाय को मार्केट में मज़बूत जगह मिल रही है और उनकी सांस्कृतिक पहचान मज़बूत हो रही है। लोकल एडमिनिस्ट्रेशन और जनता के सहयोग से इस कोशिश को और बढ़ाया जा सकता है।
रिपोर्टर : जगदीश सोलंकी
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