कुटुम्बा सीओ की कथित मनमानी के खिलाफ पीड़ित ने छेड़ी कानूनी जंग, भेजा लीगल नोटिस

औरंगाबाद :  कुटुम्बा अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज से जुड़े एक पुराने मामले में कथित तौर पर मूल अभिलेख की प्रमाणित नकल उपलब्ध नहीं कराने और लोक शिकायत प्राधिकारियों के आदेशों के अनुपालन में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर रिसियप गांव निवासी युगेश कुमार ने कुटुम्बा के अंचल अधिकारी के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू करने की बात कही है। पीड़ित ने अपने अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह के माध्यम से अंचल अधिकारी को लीगल नोटिस भेजकर पूरे मामले में जवाब मांगा है।

मामला कुटुम्बा अंचल कार्यालय में दर्ज दाखिल-खारिज वाद संख्या 725/2014-15 से संबंधित बताया गया है। अधिवक्ता की ओर से भेजे गए नोटिस में वाद से संबंधित मूल अभिलेख एवं उससे जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई है। साथ ही मामले की अद्यतन स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

नोटिस में कहा गया है कि यदि मूल अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध है तो उसका निरीक्षण कराने के साथ संपूर्ण प्रमाणित नकल तत्काल उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा दाखिल-खारिज वाद में शालिक मेहता द्वारा दिए गए मूल आवेदन, आदेश पत्र, नोटशीट, जांच प्रतिवेदन, नोटिस, बयान, संलग्न दस्तावेज और पारित आदेश की प्रमाणित प्रतियां भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

अभिवक्ता ने मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उसके अंतिम अभिरक्षक, अभिलेख के अनुपलब्ध होने की तिथि तथा उसकी खोज के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी भी लिखित रूप में मांगी है। साथ ही अभिलेख को सुरक्षित और संरक्षित रखने तथा उसमें किसी तरह की हेराफेरी, परिवर्तन या प्रतिस्थापन नहीं होने देने की मांग की गई है।
नोटिस में यह भी पूछा गया है कि मामले की जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति की लापरवाही, कदाचार या जानबूझकर की गई कार्रवाई सामने आई है या नहीं। यदि ऐसी कोई कार्रवाई पाई गई हो तो संबंधित के खिलाफ की गई विभागीय या अन्य विधिसम्मत कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है।

पीड़ित की ओर से यह आशंका भी जताई गई है कि दाखिल-खारिज वाद से जुड़ी उसकी पैतृक भूमि में खरीद-बिक्री अथवा अन्य प्रकार के हस्तांतरण की स्थिति पैदा हो सकती है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि भूमि से जुड़े लेनदेन और वास्तविक स्थिति अभिलेखों से सामने नहीं आने देने के लिए भूमि माफियाओं के दबाव या प्रभाव में आकर अधीनस्थ कर्मियों की मिलीभगत से मूल अभिलेख को जानबूझकर गायब अथवा अप्राप्य किया गया हो सकता है। हालांकि, ये सभी आरोप पीड़ित पक्ष की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
15 दिनों में जवाब की मांग
अधिवक्ता ने लीगल नोटिस के माध्यम से अंचल अधिकारी को 15 दिनों के अंदर बिंदुवार जवाब देने को कहा है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में जवाब नहीं देने अथवा ‘रिकॉर्ड की खोज जारी है’ कहकर मामले को लंबित रखने की स्थिति में पीड़ित सक्षम राजस्व एवं प्रशासनिक प्राधिकारी, लोक शिकायत प्राधिकारी तथा सक्षम न्यायालय या उच्च न्यायालय की शरण लेने को विवश होगा। इसके लिए संबंधित उत्तरदायी पदाधिकारी या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही गई है।
सीओ का पक्ष कल लिया जाएगा
इस संबंध में कुटुम्बा अंचल अधिकारी का पक्ष फिलहाल प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष अगले दिन लिया जाएगा। प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्टर : रमाकांत सिंह 

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