औरंगाबाद में मनाया गया सर सैयद डे

औरंगाबाद : ( साद उल्लाह)सर सैयद अहमद ख़ाँ के शैक्षिक एवं सामाजिक विचारों को समर्पित सर सैयद डे के अवसर पर औरंगाबाद में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में बुद्धिजीवियों को गुलपोशी एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिले के अलीग समुदाय के अनेक गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षाविदों, बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य विशिष्ट हस्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन इकरा स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, औरंगाबाद के निदेशक  इरफान इमाम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर सर सैयद अहमद ख़ाँ के शैक्षिक आंदोलन, आधुनिक शिक्षा के प्रसार तथा समाज में जागरूकता लाने के उनके प्रयासों पर चर्चा की गई। आयोजकों ने सर सैयद के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और शिक्षा के माध्यम से समाज को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य औरंगाबाद जिले के अलीग समुदाय को एक मंच पर लाना, आपसी संवाद को बढ़ावा देना तथा सर सैयद अहमद ख़ाँ की शैक्षिक एवं सामाजिक सेवाओं पर विचार-विमर्श करना रहा। इस अवसर पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उनके जीवन, वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुशासन और राष्ट्रनिर्माण में योगदान को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।
कार्यक्रम में पारस हॉस्पिटल, पटना के जनाब डॉ. सैयद आकिब फ़रीदी, बैंक ऑफ बड़ौदा, औरंगाबाद के ब्रांच मैनेजर जनाब सुल्तान जावेद, एसएएन मैनेजमेंट कंसल्टेंसी, नई दिल्ली के जनाब सैयद नदीम, एक्सिस बैंक, औरंगाबाद के जनाब ज़फ़र इकबाल, जनाब सैयद नसीम काज़िम, निदेशक जनाब एमडी इरफान इमाम तथा न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक सहित पांच पुरस्कारों से सम्मानित औरंगाबाद के फिल्म निर्माता जनाब आफताब राणा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त जनाब वसीम अख्तर (इंग्लिश एजुकेशन, WLJ), जनाब नूर आलम सिद्दीकी (ऑक्सफोर्ड इंग्लिश क्लासेज), जनाब गुलाम सरवर (उर्दू शिक्षक, मिडिल स्कूल धंधवा) तथा मुफ्ती फैजान सरवर मिस्बाही (इमाम व खतीब, नावाडीह मस्जिद, औरंगाबाद) की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
 सर सैयद डे के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षा, ज्ञान, तार्किक सोच और सामाजिक सुधार ही किसी समाज की प्रगति के मजबूत आधार हैं।
सर सैयद अहमद ख़ाँ का शैक्षिक दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है। उनके विचारों को आत्मसात कर नई पीढ़ी को शिक्षा के प्रति जागरूक बनाना और समाज में ज्ञान की रोशनी फैलाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।

रिपोर्टर : रमाकांत सिंह 

 

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