राजा भोज की विरासत का पुनरुद्धार: कोर्ट के फैसले से भोजशाला में फिर गूंजेगी मां सरस्वती की वंदना-यशवंत जैन
बालोद : माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई एवं प्रस्तुत साक्ष्यों के गहन परीक्षण के उपरांत धार स्थित भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्वीकार किया है।
इस फैसले के माध्यम से भोजशाला को धार के प्रसिद्ध राजा भोज द्वारा स्थापित प्राचीन संस्कृत शिक्षा केंद्र और वाग्देवी (मां सरस्वती) के मंदिर के रूप में कानूनी और ऐतिहासिक मान्यता मिली है।
इस निर्णय को देश की सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन शिक्षा पद्धतियों और आस्था की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिसका BJP के प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने स्वागत किया है।
श्री जैन ने बताया मध्यप्रदेश की धरा सदैव ‘सर्वधर्म समभाव’, आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता की प्रतीक रही है। हम माननीय न्यायालय के आदेश का हृदय से सम्मान करते हैं।
CM मोहन यादव की सरकार इस निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने और प्रदेश के सामाजिक सौहार्द व सांस्कृतिक गौरव को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए पूर्णतः कटिबद्ध है।
रिपोर्टर : रमेश कुमार चेलक

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