"पंचायत चुनाव से पहले प्रत्याशियों का अचानक हृदय परिवर्तन, ग्रामीणों को सुविधाओं की झड़ी"

बांका : चांदन प्रखंड के पंचायतों में प्रत्याशियों की चहलकदमी अब दिखाई दे रहा है, मतदाताओं को मिल रही है सुविधाएं 
पंचायत चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है प्रत्याशी मतदाताओं का मन टटोलने के लिए निकलने लगे हैं। इस वजह से गांव की गलियों, चौक चौराहे पर चाय, पान की दुकानों व प्रत्याशीयों द्वारा बनाई गई चौपालों की रौनक एक बार फिर परवान में चढ़ने लगी है।
चांदन प्रखंड के बिरनियां पंचायत के जयनारायण सिंह, नंदलाल प्रमाणिक, बंशी दास, अरुण तांती, वीरेंद्र मांझी, कदीर अंसारी, किशन दास, उमेश दास, महेश सिंह, आदि लोगों ने कहा कि ग्रामीणों का ब्लॉक स्तर का काम, जैसे वृद्धा पेंशन, राशन कार्ड में सुधार, नाम जुड़वाने या नाम हटवाने, प्रधानमंत्री आवास में गरीबी अमीरी की पहचान करते हुए  पैरवी, जमीन खारिज -दाखिल संबंधित पैरवी, कल तक बगैर सेवा लिए किसी काम में हाथ तक नहीं लगाने वाले जनप्रतिनिधि भी अब ईमानदारी और विकास की दुहाई दे रहे हैं।
कैसे -जब प्रत्याशी, जनप्रतिनिधि चाय की दुकान में मतदाता से मिलते हैं, उनकी भाव परिवर्तन होते ही कहते हैं भैया,चाचा,दादा आईए, चाय पीजिए, दुकानदार भी आते साथ चाय मतदाताओं के तरफ बढ़ा देता है। वर्तमान मुखिया के कार्यकाल में पंचायत में हुए विकास पर प्रकाश डालते हुए अमीरी गरीबी का फर्क दर्शाते हुए, मतदाताओं को अपनी तरफ रिझाने के लिए कि आप बहुत गरीब हैं, आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए प्रधानमंत्री आवास में, आधार सुधारना है चलिए साथ में चलते हैं। खारिज दाखिल करवाना है, चिंता मत कीजिए हम हैं, थोड़ी मेरी परेशानी होगी, लेकिन आपका काम हो जाएगा। अचानक क्षेत्र के इन जनप्रतिनिधियों का हृदय परिवर्तन, लोग अनुमान लगाने लगते हैं कि सामने पंचायती चुनाव है, इसलिए इस तरह की व्यवहार हो रही है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर बहुतायत में कथित समाजसेवी इन दिनों सड़कों के किनारे चाय दुकान, ब्लॉक परिसर के समक्ष चाय दुकानों, गांव के चौपाल में नजर आने लगे हैं।
सिंघेश्वर दास, शंभू दास, बिरेंची यादव, चतुर्भुज यादव, कालेश्वर तुरी, मनोज मांझी, आदि लोगों ने कहा कि कल तक खुद को व्यस्त बताने वाला समाजसेवियों को इन दोनों समाज के प्रति खूब चिंता सता रही है। किसकी तबीयत खराब है। किसे चरित्र प्रमाण पत्र बनाना है। या फिर कोई अन्य काम प्रत्याशी वोटरों की खिदमत में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। स्थिति अलादीन के चिराग वाले जिन्न की तरह हो गई है। लोगों की काम मुंह से निकला नहीं,कि बंदा ,प्रत्याशी हाजिर है। सलाह के साथ चाय, मुफ्त में काम करने- कराने की जिम्मेदारी भी ले रहे हैं। क्षेत्र की जनताओं को वृद्धा पेंशन, राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र आदि बनवाने वालों को इसका फायदा भी खूब मिलना शुरू हो गया है। फाॅर्म भी मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है। ग्रामीणों ने कहा हृदय परिवर्तन का मतलब है सामने पंचायती चुनाव । लेकिन जनता भोली- भाली  है जरूर लेकिन उतनी नादान भी नहीं कि जमीनी व आसमानी प्रत्याशियों का पहचान नहीं कर सके। जनता भी  वेट एंड  वॉच की स्थिति में है। इसलिए  प्रत्याशियों की अचानक हृदय परिवर्तन, प्रेम रहित भावनाओं में डुबकी लगाकर नैया पार कर रहे हैं।

रिपोर्टर : राकेश कुमार बच्चू 

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