संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान संघर्ष समिति ने प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा
बैतूल : किसान संघर्ष समिति द्वारा आज भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर जनपद चौक, आमला में एमएसपी (सी2+50%) की कानूनी गारंटी, संपूर्ण कर्जमुक्ति, चार श्रम विरोधी कानूनों को वापस लेने, मनरेगा योजना बहाल करने, भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता रद्द करने सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन का नेतृत्व किसान संघर्ष समिति के आमला तहसील अध्यक्ष दिनेश यदुवंशी एवं मुलताई तहसील अध्यक्ष कृपाल सिंह सिसोदिया ने किया। किसान नेताओं ने कहा कि भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते के माध्यम से देश की खेती पर अब तक का सबसे बड़ा हमला होने वाला है। इस समझौते के जरिए अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत के कृषि बाजार खोले जा रहे हैं। यदि यह समझौता लागू हुआ तो देश के 85 प्रतिशत छोटे एवं मध्यम किसानों के लिए यह मौत का सौदा साबित होगा।
उन्होंने कहा कि सस्ते आयातित अमेरिकी अनाज, फल, सब्जियां, दुग्ध एवं पोल्ट्री उत्पादों की बाढ़ के सामने पहले से ही घाटे में चल रही भारतीय कृषि और किसान टिक नहीं पाएंगे। इसका सीधा असर देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।
किसान नेताओं ने कहा कि संकटग्रस्त कृषि को उबारने और किसानों को राहत देने के बजाय सरकारें विकास के नाम पर कृषि भूमि का गैर-कृषि कार्यों के लिए अधिग्रहण कर रही हैं। इससे किसानों के सामने अपनी जमीन और आजीविका बचाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि अपने अस्तित्व और कृषि भूमि की रक्षा के लिए किसानों को एकजुट होकर सरकारों की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करना होगा और सड़कों पर उतरना होगा। यदि आज संघर्ष नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत कुछ बचाना मुश्किल होगा।
प्रदर्शन कार्यक्रम में चैन सिंह सिसोदिया, संतोष यादव, भरत यादव, शिवनाथ यादव, सत्यम प्रजापति, राधेश्याम यदुवंशी, गुनाराम यदुवंशी, विजय नरवरे, संजय यादव, इंदल यादव आदि शामिल हुए
रिपोर्टर : संदीप वाईकर
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