कभी कोई नहीं पूछता था, आज उसी सीट पर है भगवा का परचम...बिल्सी विधानसभा की दिलचस्प कहानी!
उत्तर प्रदेश की सियासत का जब भी जिक्र होता है, तो बदायूं जिले की चुनावी हवा हमेशा सुर्खियां बटोरती है। और बात जब बदायूं की हॉट सीट बिल्सी विधानसभा (क्रमांक 114) की हो, तो राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। यह कोई साधारण सीट नहीं है, बल्कि यहां का सियासी इतिहास इस बात की गवाही देता है कि जनता कब किसे सिंहासन पर बैठा दे और कब किसे जमीन पर ले आए, इसका अंदाजा लगाना बड़े-बड़े धुरंधरों के बस का भी नहीं है! कभी यहाँ हाथी की ऐसी दहाड़ गूंजी थी कि विरोधी देखते रह गए थे, तो पिछले दो चुनावों से कमल ऐसा खिला है कि विरोधियों के सारे समीकरण धरे के धरे रह गए हैं। आइए, खोलते हैं बिल्सी के सियासी पन्ने और जानते हैं कि पिछले तीन चुनावों में यहां असल खेल क्या रहा है!
साल 2012 का विधानसभा चुनाव राजनीतिक पंडितों के लिए भी किसी पहेली से कम नहीं था। मैदान में चौतरफा मुकाबला था, लेकिन बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर उतरे मुसर्रत अली बिट्टन ने ऐसा दांव चला कि बाजी अपने नाम कर ली।
किसको मिले कितने वोट:
विजेता (BSP): मुसर्रत अली बिट्टन -57,600 वोट
दूसरे स्थान पर (SP): विमल कृष्ण अग्रवाल -49,272 वोट
तीसरे स्थान पर: सुरेश पाल सिंह तोमर -23,360 वोट
कांग्रेस प्रत्याशी: ब्रजपाल सिंह -17,472 वोट
भाजपा प्रत्याशी: सीमा चौहान -4,361 वोट (छठे स्थान पर!)
लगभग 60.55 प्रतिशत मतदान के बीच मुकाबला समाजवादी पार्टी और बीएसपी के बीच बेहद कड़ा था। सपा के विमल कृष्ण अग्रवाल ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन मुसर्रत अली बिट्टन ने 8,328 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर विधानसभा की कुर्सी पर कब्जा जमाया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिस भाजपा को आज इस सीट पर अजेय माना जा रहा है, वह 2012 में छठे पायदान पर थी!
पाँच साल बीते, सूबे में सियासी हवा का रुख पूरी तरह बदल गया और बिल्सी में भी भूचाल आ गया। साल 2017 में बीजेपी की सुनामी ऐसी चली कि जो पार्टी 2012 में छठे नंबर पर थी, उसने सीधे नंबर-1 की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया। बीजेपी के टिकट पर उतरे पंडित राधा कृष्ण शर्मा ने मैदान में ऐसा करिश्मा दिखाया कि देखने वाले दंग रह गए।
किसको मिले कितने वोट:
विजेता (BJP): पंडित राधा कृष्ण शर्मा -82,070 वोट
दूसरे स्थान पर (BSP): मुसर्रत अली बिट्टन -55,091 वोट
तीसरे स्थान पर (SP): विमल कृष्ण अग्रवाल उर्फ पप्पी -50,848 वोट
जीत का अंतर: 26,979 वोट
लगभग 58.69 प्रतिशत मतदान के बीच, बीजेपी के पंडित राधा कृष्ण शर्मा ने 82 हजार से ज्यादा वोट बटोरे और पिछली बार के विजेता मुसर्रत अली बिट्टन को 26,979 भारी-भरकम वोटों से करारी शिकस्त दी। बिल्सी की जनता ने दिखा दिया कि यहां पुराना इतिहास ज्यादा दिन टिकता नहीं, वक्त के साथ मूड बदलना यहां की फितरत है।
साल 2022 का विधानसभा चुनाव यानी हालिया सियासी महासंग्राम, जिसने बिल्सी में रोमांच की सारी हदें पार कर दीं। इस बार बीजेपी ने अपनी रणनीति बदलते हुए नया चेहरा मैदान में उतारा और हरीश चंद्र शाक्य पर दांव खेला। समाजवादी पार्टी ने भी चंद्र प्रकाश मौर्य को उतारकर पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन परिणाम ने फिर से भगवा खेमे में जश्न मना दिया।
किसको मिले कितने वोट:
विजेता (BJP): हरीश चंद्र शाक्य -93,500 वोट
दूसरे स्थान पर (SP): चंद्र प्रकाश मौर्य -68,385 वोट
तीसरे स्थान पर (BSP): ममता शाक्य -31,694 वोट
कांग्रेस प्रत्याशी: अंकित चौहान -1,890 वोट
जीत का अंतर: 25,115 वोट
लगभग 57.8 प्रतिशत मतदान के साथ, बीजेपी के हरीश चंद्र शाक्य ने 93,500 वोट हासिल किए और सपा के चंद्र प्रकाश मौर्य को 25,115 वोटों के अंतर से मात दी। बीजेपी ने चेहरा जरूर बदला, लेकिन बिल्सी के किले पर लगातार दूसरी बार जीत का परचम फहराकर यह साबित कर दिया कि इस सीट पर उनकी पकड़ अब बेहद मजबूत हो चुकी है। इतिहास के पन्ने कहते हैं अगर पिछले तीन चुनावों के इस सफर को एक नजर में देखें, तो तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाती है:
2012 में बीएसपी (मुसर्रत अली बिट्टन) ने बाजी मारी।
2017 में बीजेपी (पंडित राधा कृष्ण शर्मा) ने यह सीट छीनकर भगवा रंग में रंग दी।
2022 में बीजेपी (हरीश चंद्र शाक्य) ने लगातार दूसरी जीत दर्ज कर अपना वर्चस्व कायम रखा।
अब जब निगाहें अगले चुनावी रण पर टिकी हैं, तो जनता के मन में भी कई बड़े सवाल सुलग रहे हैं। इस बार सिर्फ हवा या नारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन जमीनी और स्थानीय मुद्दों पर वोटों की तौल होगी। गांवों की टूटी-फूट सड़कें और गलियों में जलभराव की गंभीर समस्या। किसानों के लिए सिंचाई के साधन, बिजली की आवाजाही और फसलों के सही दाम से जुड़े सवाल। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर और पलायन की मजबूरी। सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों में बदहाल इलाज और सरकारी स्कूलों की दशा-दिशा। सबसे बड़ा सवाल विधायक जी का रिपोर्ट कार्ड और जनता के बीच उनकी सक्रियता!
बिल्सी विधानसभा सीट की यह सियासत किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। एक तरफ बीजेपी अपनी लगातार दो बार की जीत के सिलसिले को बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है, तो वहीं विपक्षी दल इस बार की कमियों को हथियार बनाकर जोरदार वापसी की प्लानिंग कर रहे हैं। आने वाले वक्त में जनता किसके सिर पर ताज सजाएगी और कौन किस पर भारी पड़ेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि बिल्सी का अगला चुनावी दंगल बेहद रोमांचक, कांटे की टक्कर वाला और धमाकेदार होने वाला है!

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