जिला अस्पताल खरीद अनियमितता मामले में शासन के निर्णय का इंतजार
बुलढाणा : बुलढाणा जिला सामान्य अस्पताल की खरीद प्रक्रिया में हुई बताई जा रही आर्थिक अनियमितताओं, कथित भ्रष्टाचार और सरकारी निधि के दुरुपयोग के मामले को लेकर पिछले चार वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से जांच, पत्राचार और रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद अंतिम निर्णय लंबित होने का दावा किया गया है। इस मामले में महाराष्ट्र सरकार तत्काल निर्णय ले, इस मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत ज्ञानदेव खरात ने १४ अगस्त से मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन शुरू किया है।
इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, १९८८ में वर्ष २०१८ में किए गए संशोधन के अनुसार धारा १७-अ के तहत आगे की जांच एवं आवश्यक आपराधिक कार्रवाई के लिए शासन की मंजूरी मांगी है। खरात के निवेदन में तत्कालीन महासंचालक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा २६ जुलाई २०२४ को संबंधित विभाग के साथ किए गए विस्तृत पत्राचार का भी उल्लेख किया गया है।
विभिन्न सरकारी विभागों के बीच पत्राचार
निवेदन के अनुसार इस मामले को लेकर गृह विभाग, विधि एवं न्याय विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से समय-समय पर पत्राचार किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा ५ अगस्त २०२६ को सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के साथ किए गए पत्राचार में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा १७-अ के तहत आवश्यक निर्णय अभी भी लंबित होने की बात सामने रखे जाने का दावा किया गया है।शासन स्तर की जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने का दावा
निवेदन के अनुसार इस मामले में शासन स्तर पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट के साथ ही महाराष्ट्र मेडिकल गुड्स प्रोक्योरमेंट अथॉरिटी की जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध है। ऐसे में उपलब्ध जांच रिपोर्टों के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति की जांच कर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग की गई है।
चंद्रकांत खरात के अनुसार यह मामला केवल शिकायतकर्ता और संबंधित विभाग के बीच का विषय नहीं है, बल्कि सरकारी आर्थिक हित, सार्वजनिक धन की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार प्रतिबंध से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक मामला है।चार वर्षों से लगातार कर रहे हैं प्रयास
चंद्रकांत खरात ने पिछले चार वर्षों से विभिन्न सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष शिकायतें, निवेदन, स्मरणपत्र तथा उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत कर लगातार इस मामले का पीछा किए जाने की बात कही है। विभिन्न सरकारी स्तरों पर पत्राचार होने के बावजूद मामले का अंतिम कानूनी निपटारा नहीं होने से उन्होंने प्रशासनिक देरी पर नाराजगी व्यक्त की है।
धारा १७-अ के तहत तत्काल निर्णय की मांग
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा १७-अ के तहत मंजूरी का प्रस्ताव फिलहाल किस स्तर पर लंबित है, इसकी तत्काल पड़ताल कर समयबद्ध तरीके से निर्णय लिया जाए, यह प्रमुख मांग की गई है। शासन की मंजूरी मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को आगे की जांच तथा कानून के अनुसार आवश्यक आपराधिक कार्रवाई के लिए प्रशासनिक मार्ग उपलब्ध कराया जाए, ऐसी भी मांग की गई है।
उपलब्ध जांच रिपोर्टों के आधार पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। दोष पाए जाने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ आवश्यकता होने पर आपराधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, जांच में सरकारी निधि को आर्थिक नुकसान पहुंचने की बात सामने आने पर नियमानुसार नुकसान की राशि निर्धारित कर संबंधितों से वसूली की कार्रवाई की जाए, ऐसी मांग भी की गई है।
आजाद मैदान में आमरण अनशन से प्रशासन का ध्यान लंबित प्रशासनिक एवं कानूनी निर्णय तत्काल लिए जाने की मांग को लेकर १४ अगस्त से मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन शुरू किया गया है। यह आंदोलन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। लंबित मामले को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अंतिम दिशा मिले, ऐसी भूमिका चंद्रकांत खरात ने व्यक्त की है।इस बीच, बुलढाणा जिला सामान्य अस्पताल की कथित खरीद अनियमितता के मामले में धारा १७-अ के तहत शासन की मंजूरी को लेकर सरकार क्या निर्णय लेती है और उसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की आगे की जांच एवं कानूनी कार्रवाई को किस प्रकार दिशा मिलती है, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।
रिपोर्टर : राजेश
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