किसान, बैल और ग्रामीण जीवन की भूमिकाओं से साकार हुआ संस्कृति जागरण; ‘पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ’ का पर्यावरण संरक्षण का संदेश

देऊलगांव राजा : क्रांतिज्योति सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले नगर परिषद मराठी प्राथमिक विद्यालय में विद्यार्थियों की उत्स्फूर्त भागीदारी से पारंपरिक तान्हा पोळा पर्व उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने किसान, बैल तथा ग्रामीण जीवन से संबंधित विभिन्न भूमिकाएं निभाकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों की अभिनव प्रस्तुति के माध्यम से किसानों की मेहनत, खेती का महत्व और कृषि कार्यों में बैलों के अनन्य योगदान को प्रभावी ढंग से उजागर किया गया।बैलपोळा महाराष्ट्र का एक पारंपरिक पर्व है, जो किसान और बैल के बीच के आत्मीय संबंध, कृतज्ञता और ऋणानुबंध को संजोता है। इस पर्व का सांस्कृतिक महत्व विद्यार्थियों को समझ में आए, ग्रामीण जीवनशैली से उनका परिचय हो तथा नई पीढ़ी की अपनी परंपरा और संस्कृति से नाळ और अधिक मजबूत हो, इस उद्देश्य से नगर परिषद के मुख्याधिकारी अरुण मोकळ के मार्गदर्शन में विद्यालय में विभिन्न उपक्रमों का आयोजन किया गया।

विद्यार्थियों ने साकार किया कृषि प्रधान जीवन का चित्र
विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर किसानों की भूमिकाएं निभाईं। अभिनय, संवाद और प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने किसानों की दैनिक मेहनत, खेती का महत्व, कृषि कार्यों में बैलों का योगदान तथा ग्रामीण संस्कृति की विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की मासूम और उत्स्फूर्त प्रस्तुति से विद्यालय परिसर में पारंपरिक ग्रामीण वातावरण की अनुभूति हुई।पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ’ का दिया संदेश
तान्हा पोळा के अवसर पर विद्यार्थियों ने केवल परंपरा का दर्शन ही नहीं कराया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश भी दिया। “प्रकृति की रक्षा करें”, “पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ”, “पर्यावरण की रक्षा करें” तथा “प्राणी मात्र पर दया करें” जैसे विभिन्न संदेशों के माध्यम से विद्यार्थियों ने जनजागृति की। वृक्ष संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के साथ अपने संबंध को बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है, यह संदेश इस उपक्रम के माध्यम से दिया गया।
परंपरा, कृतज्ञता और पर्यावरण संरक्षण का त्रिवेणी संगम
पारंपरिक पर्व के माध्यम से संस्कृति का संरक्षण, किसानों के प्रति कृतज्ञता और पर्यावरण संरक्षण—इन तीनों पहलुओं का सुंदर संगम इस उपक्रम में देखने को मिला। विद्यार्थियों की उत्स्फूर्त भागीदारी, आकर्षक वेशभूषा और विभिन्न भूमिकाओं की प्रस्तुति से विद्यालय का वातावरण आनंदमय हो गया।इस उपक्रम से विद्यार्थियों की रचनात्मकता, अभिनय कौशल, आत्मविश्वास और सामाजिक जागरूकता को प्रोत्साहन मिला। किताबी शिक्षा के साथ-साथ पारंपरिक त्योहार, संस्कृति, खेती और पर्यावरण का प्रत्यक्ष अनुभव विद्यार्थियों को मिलने से यह उपक्रम शैक्षणिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।
कार्यक्रम में स्कूल प्रबंधन समिति के पदाधिकारी एवं सभी सदस्य, अभिभावक, मुख्याध्यापक तथा विद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित थे। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न भूमिकाओं की अभिभावकों और नागरिकों ने सराहना की।
परंपरा का संरक्षण, किसानों के प्रति कृतज्ञता, पर्यावरण का संवर्धन और प्राणी मात्र के प्रति प्रेम—इन मूल्यों का सुंदर संदेश देने वाला तान्हा पोळा उत्सव विद्यालय में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ।

रिपोर्टर : राजेश पंडित 

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