बस्तर में स्थानीय युवाओं को रोजगार और बंदियों की रिहाई की मांग तेज,सर्व आदिवासी समाज का बड़ा ज्ञापन

दंतेवाड़ा : आज जिला दंतेवाड़ा में “नियमितीकरण, 100% स्थानीय भर्ती और निर्दोष बंदियों को रिहाई देने की मांग—सरकार से ऐतिहासिक फैसले की अपील”

दंतेवाड़ा। बस्तर संभाग में स्थानीय युवाओं के रोजगार और जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने जोरदार पहल की है। जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में रोजगार, न्याय और सामाजिक पुनर्स्थापन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई गई हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि बस्तर और सरगुजा जैसे अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए। पहले लागू व्यवस्था के तहत स्थानीय भर्ती से युवाओं को रोजगार मिलता था और प्रशासन में स्थानीय भाषा व परिस्थितियों की समझ भी बनी रहती थी, लेकिन वर्तमान में इस व्यवस्था के कमजोर होने से युवाओं में भारी असंतोष है।
साथ ही, स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को लेकर भी गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। समाज ने मांग की है कि DMFT मद से हो रही संविदा भर्तियों को तत्काल बंद किया जाए और वर्तमान संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का अनुभव व योग्यता के आधार पर नियमितीकरण किया जाए। जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक “समान कार्य, समान वेतन” के सिद्धांत पर उचित मानदेय देने की मांग की गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि बस्तर संभाग के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों पर केवल स्थानीय युवाओं की भर्ती सुनिश्चित की जाए और भर्ती नियमों में संशोधन कर स्थानीय निवास की शर्त को सख्ती से लागू किया जाए।
वहीं, नक्सलवाद मुक्त घोषित बस्तर के संदर्भ में जेलों में बंद आदिवासियों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया है। समाज ने मांग की है कि एक “बस्तर शांति समीक्षा समिति” का गठन किया जाए, जो हर बंदी के मामले की निष्पक्ष जांच करे। जिन बंदियों पर गंभीर आरोपों के ठोस सबूत नहीं हैं, उन्हें विशेष आम माफी के तहत तत्काल रिहा किया जाए।
इसके अलावा, गरीब और भाषा की समस्या से जूझ रहे आदिवासियों को उच्चस्तरीय विधिक सहायता उपलब्ध कराने, तथा रिहा होने वाले व्यक्तियों के लिए रोजगार और आर्थिक पैकेज के साथ सामाजिक पुनर्स्थापन योजना लागू करने की मांग भी रखी गई है।
सर्व आदिवासी समाज ने सरकार से अपील की है कि बस्तर को नक्सलवाद मुक्त घोषित करने के बाद अब न्याय और विकास के नए अध्याय की शुरुआत की जाए। समाज का कहना है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार और निर्दोष बंदियों की रिहाई ही बस्तर में स्थायी शांति और विश्वास बहाली का सबसे बड़ा कदम होगा। ज्ञापन देने गए मौजूदगी जिला आदिवासी समाज के अध्यक्ष सुरेश कर्मा संरक्षक बल्लू भवानी जिला पंचायत सदस्य सोमारू कडती रविकुमार नाग समाज के आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्टर : ए आर कर्मा 

 

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