पंडोखर धाम महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब
दतिया : 30वें पंडोखर सरकार धाम महोत्सव एवं श्रीराम महायज्ञ के दौरान गुरुवार को केंद्रीय मत्स्य पालन, डेयरी एवं पंचायती राज राज्यमंत्री एस.पी. सिंह बघेल पंडोखर धाम पहुंचे,उन्होंने यहां पहुंचकर पंडोखर पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया और धार्मिक अनुष्ठानों में भागीदारी की। मंत्री बघेल ने सबसे पहले बालाजी पंडोखर सरकार की पूजा-अर्चना और आरती की,इसके बाद वे श्रीराम महायज्ञ शाला पहुंचे, जहां उन्होंने यज्ञ नारायण भगवान की परिक्रमा कर मेला क्षेत्र का भ्रमण किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा मंच पर उनका पारंपरिक तरीके से तस्वीर एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया।सनातन संस्कृति को सशक्त बनाने वाले आयोजन: बघेलपत्रकारों से चर्चा में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंडोखर धाम में आयोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भारत की संस्कृति, गीता, पुराण, रामायण और उपनिषदों की परंपराओं को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन देश की एकता, अखंडता, भाईचारा और सद्भाव को मजबूत करते हैं।उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिमी संस्कृति तेजी से घरों में प्रवेश कर रही है, जिससे नई पीढ़ी अपने मूल संस्कारों से दूर होती जा रही है।आज के बच्चे मिकी माउस और टॉम एंड जेरी को जानते हैं, लेकिन राम की माता का नाम पूछने पर गूगल करना पड़ता है। हमें अपनी संस्कृति के ज्ञान को आत्मसात करना होगा।”उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक व्यक्ति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार होता है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में भी मानवीय दृष्टिकोण मजबूत होता है।इतिहास के बावजूद सनातन रहा अडिग,मंत्री बघेल ने कहा कि इतिहास में कई आक्रमणकारियों ने सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास किया, लेकिन संतों, महात्माओं और आचार्यों ने इसे जीवित रखा। आज भी उनके प्रयासों से सनातन संस्कृति निरंतर विकसित हो रही है।श्रीमद्भागवत कथा का समापन, सुदामा चरित्र ने भाव-विभोर किया,महोत्सव के दौरान गुरुवार को श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ। कथा व्यास पंडित विनोद शास्त्री ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि यह प्रसंग निस्वार्थ मित्रता और अटूट भक्ति का प्रतीक है।उन्होंने बताया कि कैसे सुदामा ने भगवान कृष्ण से कुछ नहीं मांगा, लेकिन कृष्ण ने उनकी सच्ची भक्ति को पहचानकर उनकी दरिद्रता दूर कर दी।ईश्वर केवल प्रेम और निष्कपट भक्ति के भूखे होते हैं।” कथा समापन पर मीरा देवी एवं सतीश सोनी परिवार द्वारा पूजन एवं आरती की गई।आज से हनुमत प्रसंग कथा और भजन संध्या,महोत्सव में 10 से 14 अप्रैल तक पंडित बृजराज अभिषेक (उत्तराखंड) द्वारा हनुमत प्रसंग कथा का वाचन किया जाएगा।
इसके साथ ही शुक्रवार को हमसर हयात एंड ग्रुप (दिल्ली) द्वारा भव्य भजन संध्या का आयोजन होगा। बुंदेली राई गायन ने बांधा समा
बुधवार रात्रि सांस्कृतिक मंच पर जित्तू खरे एंड ग्रुप ने बुंदेली राई गायन प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ वेद मंत्रों और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कलाकारों ने भक्ति गीतों और हास्य प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।मेला बना आजीविका का बड़ा केंद्र,पंडोखर मेले में दूर-दूर से आए दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजाई हैं। यहां कॉस्मेटिक्स, घरेलू सामान, झूले, खानपान स्टॉल और मनोरंजन के साधन बड़ी संख्या में मौजूद हैं,दुकानदारों का कहना है कि:
भोजन, पानी, बिजली और दुकान की जगह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैसुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैंहर साल यहां अच्छी कमाई होती है,डबरा, जालौन, इंदरगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से आए व्यापारियों ने बताया कि पंडोखर मेला उनके लिए रोजगार का महत्वपूर्ण अवसर बन चुका है।श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़,महोत्सव में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जो पूजन, कथा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले का आनंद ले रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक रंग देखने को मिल रहा है।समग्र रूप से पंडोखर धाम महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह सांस्कृतिक संरक्षण, सामाजिक समरसता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती *देने का माध्यम साबित हो रहा है।
रिपोर्टर : नितिन दांतरे


No Previous Comments found.