रासायनिक खेती छोड़ जैविक खेती अपनाने के लिए किसानों को करें जागरूक: कलेक्टर ऋतुराज सिंह

​देवास : कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने जिले के किसानों से रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि खेतों में यूरिया का लगातार बढ़ता उपयोग चिंताजनक है। इसे कम करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर बढ़ना न केवल भूमि के स्वास्थ्य के लिए, बल्कि मानव स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहद जरूरी है।

​यह बात कलेक्टर श्री सिंह ने जिला पंचायत सभाकक्ष में 'दृष्टि योजना' अंतर्गत पंख कार्यक्रम के तहत आयोजित स्वयंसेवी संस्थाओं की जिला स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में डीएफओ अमित सिंह, जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक शिवप्रसाद मालवीय, जिला समन्वयक डॉ. सुप्रीति यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य उपस्थित थे।
​शुरुआती तौर पर 2 बीघा में कराएं जैविक खेती
​बैठक में कलेक्टर ने जन अभियान परिषद के मजबूत नेटवर्क की सराहना करते हुए कहा कि इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। प्रदेश सरकार द्वारा इस वर्ष को 'कृषि वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है।
​"यदि किसी किसान के पास 10 बीघा जमीन है, तो उसे शुरुआती तौर पर कम से कम 2 बीघा जमीन में जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया जाए। धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जाए। जैविक फसल का दाम बाजार में ज्यादा मिलता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।"
— ऋतुराज सिंह, कलेक्टर, देवास
​उन्होंने परिषद के सदस्यों को गांव-गांव जाकर किसानों को रासायनिक खेती के नुकसान और जैविक खेती के फायदों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।
​नरवाई न जलाने की अपील, उपकरणों पर मिलेगी सब्सिडी
​कलेक्टर ने आगामी सीजन में किसानों को खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) न जलाने के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नरवाई जलाने से मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व और मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने किसानों से शासन द्वारा मिल रही सब्सिडी का लाभ उठाकर नरवाई प्रबंधन उपकरण खरीदने की अपील की। इसके साथ ही, मानसून में पौधारोपण करने और पौधों की फोटो पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए गए।
​जंक फूड से बचें, कुपोषण मिटाने के लिए घर-घर जाएं महिलाएं
​स्वास्थ्य और पोषण पर जोर देते हुए कलेक्टर ने कहा कि कुपोषण को खत्म करने के लिए 'प्रस्फुटन समिति' की महिलाएं गांव में घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करें। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
​अक्सर बच्चे को भूख लगने पर बाजार के चिप्स, कुरकुरे या जंक फूड खिला दिए जाते हैं।
​इससे बच्चों का पेट तो भर जाता है, लेकिन जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते और वे मुख्य भोजन नहीं खा पाते।
​यही बच्चे धीरे-धीरे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं।
​उन्होंने समिति की महिलाओं को सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों को अच्छे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।
​'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत हो रहे कार्य
​बैठक में जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक शिवप्रसाद मालवीय ने बताया कि म.प्र. शासन के निर्देशानुसार जिले में "जल गंगा संवर्धन अभियान" के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के कार्य किए जा रहे हैं। जिले में परिषद की 172 संस्थाएं पूरी सक्रियता से काम कर रही हैं। आगामी वर्षा ऋतु में वृहद पौधारोपण के लिए ग्राम स्तर पर विशेष नर्सरियां तैयार की जा रही हैं, ताकि पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। बैठक में पंख कार्यक्रम के उद्देश्यों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।

रिपोर्टर - साजिद पठान

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