एसडीएम की फटकार से हड़कंप: टोंक खुर्द जनसुनवाई में खुली शिक्षा विभाग की पोल

देवास : मंगलवार को टोंकखुर्द तहसील मुख्यालय पर आयोजित जनसुनवाई में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शिक्षा विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई। जनसुनवाई में मामलों का निराकरण कर रहीं एसडीएम रितु चौरसिया ने लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को लेकर बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स समन्वयक) अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद एसडीएम का पारा चढ़ गया और उन्होंने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया।

​श्मशान के सामने बना दिया स्कूल, ग्रामीण बोले— "जहां जाने से डरते हैं, वहां बच्चे कैसे पढ़ेंगे?" ​जनसुनवाई में डींगरोदा गांव के ग्रामीणों ने एक बेहद हैरान करने वाला मामला उठाया। ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षा विभाग ने गांव के श्मशान घाट के ठीक सामने स्कूल भवन का निर्माण करवा दिया है। ग्रामीणों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा: ​"जब श्मशान के सामने कोई आम इंसान अपना घर तक नहीं बनाता, तो वहां बच्चों के लिए स्कूल भवन कैसे खड़ा कर दिया गया? जिस जगह पर जाने से आम आदमी भी दिन में डरता है, वहां हमारे मासूम बच्चे बैठकर शिक्षा कैसे ग्रहण करेंगे?" ​इस गंभीर मामले को सुनते ही एसडीएम रितु चौरसिया भड़क गईं और उन्होंने मौके पर मौजूद बीआरसी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए इस पर तुरंत जवाब तलब किया। तिनदुरिया में जर्जर भवन में 'तिरपाल' के साए में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल
​लापरवाही का यह इकलौता मामला नहीं है। जनसुनवाई में ग्राम पंचायत तिनदुरिया का मामला भी गूंजा। यहां का शासकीय स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बारिश के इस मौसम में छत टपकने के कारण स्कूल स्टाफ और बच्चे छत पर बरसाती (तिरपाल) डालकर बैठने को मजबूर हैं। ​इस बदहाली ने शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है। जनसुनवाई में उठे इन मुद्दों ने कई सुलगते सवाल खड़े कर दिए हैं: ​क्या शिक्षा विभाग स्कूलों के मेंटेनेंस (रखरखाव) के लिए बजट जारी नहीं करता ? यदि सरकार से मेंटेनेंस का पैसा आता है, तो वह बजट आखिर किसकी जेब में जा रहा है?
​जर्जर भवनों में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन होगा? ​बीआरसी ने झाड़ा पल्ला: बोले— "बीईओ से बात कीजिए"
​जब इस पूरे मामले और अव्यवस्थाओं को लेकर मीडियाकर्मियों ने ब्लॉक रिसोर्स समन्वयक (बीआरसी) से सवाल किए, तो वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आए। बीआरसी ने कैमरे के सामने सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बचते हुए केवल इतना कहा कि "इस मामले में आप बीईओ (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) से बात कीजिए।"

​अब देखना यह है...​जनसुनवाई में एसडीएम की इस सख्त फटकार के बाद क्या कुंभकर्णी नींद में सोया शिक्षा विभाग अपनी आंखें खोलेगा? क्या डींगरोदा के बच्चों को श्मशान के साए से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर स्कूल नसीब होगा और तिनदुरिया के जर्जर स्कूल की सुध ली जाएगी? या फिर अधिकारियों की यह 'नो-कमिटमेंट' वाली नीति बच्चों के भविष्य के साथ यूं ही खिलवाड़ करती रहेगी ?


रिपोर्टर : साजिद पठान

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