रीढ़ की हड्डी की समस्या और समाधान-- डॉ हिमांशु कृष्णा के साथ ||
रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों की मजबूती हमारे शरीर के स्वास्थ्य और जीवनशैली के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। लेकिन अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। गलत पोस्चर, मोटापा, कमजोर मसल्स और अनुचित नींद की आदतें स्पाइन पर दबाव डालकर पीठ और गर्दन के दर्द जैसी समस्याओं को जन्म देती हैं।ऐसे में हमने देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन और न्यूरोस्पाइन विशेषज्ञ, डॉ. हिमांशु कृष्णा से खास बातचीत की ..जिसमें उन्होनें रीढ़ की हड्डी की देखभाल, मसल स्ट्रेंथनिंग, एक्सरसाइज और रोज़मर्रा की आदतों के बारे में विस्तार से बताते हैं।डॉ. कृष्णा इस इंटरव्यू में यह समझाते हैं कि कैसे साधारण लेकिन नियमित एक्सरसाइज, सही पोस्चर, नींद का ध्यान और वजन नियंत्रण आपके स्पाइन को मजबूत और दर्द मुक्त बनाए रख सकते हैं। साथ ही, वे यह भी बताते हैं कि क्यों महिलाओं में स्पाइनल प्रॉब्लम्स ज्यादा आम हैं और इसे कैसे रोका जा सकता है।
रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर में कितना महत्वपूर्ण रोल प्ले करती है?
डॉ. हिमांशु कृष्णा के मुताबिक , रीढ़ की हड्डी सिर्फ शरीर को सहारा नहीं देती, बल्कि यह हमारे पूरे पोस्चर और शरीर की स्थिरता में अहम भूमिका निभाती है। इंसान और अन्य चौपायियों में फर्क यही है कि हम सीधे खड़े हो सकते हैं। इसका मुख्य कारण हमारी स्पाइन का अपराइट ओरिएंटेशन और इसे घेरे मांसपेशियां हैं, जो इसे सही पोजिशन में बनाए रखती हैं।

क्या मांसपेशियों की कमजोरी भी रीढ़ की हड्डी की समस्याओं का कारण बन सकती है?
डॉ. हिमांशु कृष्णा ने कहा कि बिलकुल, अगर मांसपेशियां कमजोर हों, तो रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है और कर्विंग या दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उम्र के साथ यह प्रक्रिया और तेज होती है, लेकिन इसे धीमा किया जा सकता है।
कई लोग पीठ दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा करने से क्या नुकसान हो सकता है?
डॉ. हिमांशु कृष्णा ने साफ तौर पर कहा कि पीठ दर्द को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। स्पाइन में दर्द हमेशा गंभीर समस्या नहीं बताता, लेकिन इसे अनदेखा करना भविष्य में बड़ी समस्या पैदा कर सकता है। स्पाइन में अलग-अलग हिस्से—सर्वाइकल (गर्दन), थोरेसिक (पीठ), लम्बर (कमर), साक्रम (कूल्हों के बीच)—में समस्याएं हो सकती हैं।

क्या स्पाइन सर्जरी अब भी उतनी ही जटिल है जितनी पहले थी?
डॉ. हिमांशु कृष्णा ने बताया कि , पहले बड़े चीरे लगाकर सर्जरी करनी पड़ती थी, लेकिन अब तकनीक में सुधार के कारण सर्जरी कम से कम और सुरक्षित तरीके से की जाती है। हालांकि, तेज दर्द और अक्यूट स्थितियों में किसी भी तरह की एक्सरसाइज या मोबिलाइजेशन तुरंत शुरू करना दर्द बढ़ा सकता है।
मांसपेशियों को मजबूत कैसे रखा जा सकता है, खासकर उम्र बढ़ने के साथ?
डॉ. हिमांशु कृष्णा ने इस विषय में बताया कि , मांसपेशियों को मजबूत रखना जरूरी है। मसल्स कमजोर हों, तो रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ सकती हैं। उम्र बढ़ने के साथ यह कमजोरी सामान्य है, लेकिन नियमित एक्सरसाइज और सही पोस्चर इसे धीमा कर सकता है।

आम लोगों के लिए क्या सलाह रहेगी?
डॉ. हिमांशु कृष्णा ने कहा कि , रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों की नियमित देखभाल जरूरी है। भारी वजन उठाने से बचें, सही पोस्चर बनाए रखें और दर्द या सूजन होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें। सही देखभाल से जीवन की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।
क्या मोटापा स्पाइन पेन का कारण बन सकता है?
डॉ. कृष्णा: हां, मोटापा स्पाइन पर दबाव बढ़ाता है। पेट का हिस्सा आगे बढ़ने से कमर और लंबर एरिया पर अतिरिक्त स्ट्रेन पड़ता है, जिससे हाइपरडोसिस और मसल्स इम्बैलेंस होती है। इससे डिस्क प्रॉब्लम्स और जॉइंट लूज़नेस जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
क्या स्पाइनल प्रॉब्लम्स महिलाओं में ज्यादा देखी जाती हैं?
डॉ. कृष्णा: हां, महिलाओं में यह अधिक कॉमन है। इसका कारण घर के अंदर सीमित फिजिकल एक्टिविटी, सेल्फ-केयर की कमी और हॉर्मोनल बदलाव हैं।

रोज़मर्रा की आदतों में कौन-सी चीजें अपनानी चाहिए, खासकर महिलाओं के लिए?
डॉ. हिमांशु कृष्णा ने इस विषय में कहा कि
मसल स्ट्रेंथनिंग और नियमित एक्सरसाइज।
वेट कंट्रोल और सही न्यूट्रिशन।
पर्याप्त पानी पीना।
सही स्लीपिंग पोश्चर और उपयुक्त पिलो।
पिलो का चुनाव कैसे करना चाहिए?
डॉ. हिमांशु कृष्णा के मुताबिक ,
पेट और पीठ के बल लेटते समय पतला पिलो रखें ताकि गर्दन की कर्वचर मेंटेन रहे।
करवट में लेटते समय पिलो इतना मोटा हो कि नेक और शोल्डर एक लाइन में रहें।
कॉटन या पॉलीफाइबर दोनों चलेगा, बस फाइबर लंबे समय तक शेप में रहे।
पिलो साइड्स में होना चाहिए ताकि गर्दन और शोल्डर सही पोजीशन में रहें।

क्या सर्वाइकल पेन (गर्दन दर्द) भी इसी तरह मैनेज किया जा सकता है?
डॉ. हिमांशु कृष्णा ने इस विषय में कहा कि, हां, गर्दन और शोल्डर की सही पोजिशन, स्ट्रेचिंग और मसल स्ट्रेंथनिंग बहुत जरूरी है। यह केवल नींद या पिलो तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे स्पाइन की देखभाल का हिस्सा होना चाहिए।
रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों की देखभाल केवल एक चिकित्सकीय सलाह नहीं, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की जीवनशैली का अहम हिस्सा है। डॉ. हिमांशु कृष्णा के अनुसार, सही पोस्चर, नियमित स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज, वजन नियंत्रण, पर्याप्त हाइड्रेशन और उचित नींद—ये सभी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण आदतें आपके स्पाइन को मजबूत और दर्द मुक्त बनाए रख सकती हैं।जितनी जल्दी हम अपने शरीर की जरूरतों को समझकर इन्हें अपनाते हैं, उतनी ही बेहतर हमारी जीवनशैली और स्वास्थ्य रहेगी। याद रखिए, स्पाइन हेल्थ को नजरअंदाज करना सिर्फ आज का दर्द नहीं, बल्कि भविष्य में बड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है।इसलिए, आज ही अपने मसल्स को मजबूत करना, पोस्चर सुधारना और छोटे-छोटे बदलावों के माध्यम से अपनी रीढ़ की हड्डी की देखभाल करना शुरू करें। आपकी छोटी मेहनत ही लंबे समय तक दर्दमुक्त और सक्रिय जीवन की कुंजी है।
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