राम राज्याभिषेक के साथ संपन्न हुई श्री राम कथा, फूलों की होली में झूमे श्रद्धालु
एटा : जलेसर तहसील क्षेत्र के नगला सुखदेव स्थित मंदिर श्री देवलोक धाम में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के नौवें दिन भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। पूरा देवलोक धाम परिसर भगवान श्रीराम के जयघोष, भजनों और धार्मिक अनुष्ठानों से गुंजायमान रहा। कथा के अंतिम दिवस प्रातः काल से ही श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर में पहुंचना शुरू हो गया था। दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आए श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पर पहुंचकर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के दर्शन किए तथा धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और धार्मिक झांकियों से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक आभा से ओतप्रोत दिखाई दे रहा था। कथावाचक भक्त शरण महाराज ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र, उनके आदर्शों तथा रामराज्य की महत्ता का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मानव समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है। उन्होंने कहा कि रामराज्य केवल एक शासन व्यवस्था नहीं बल्कि न्याय, समानता, प्रेम, करुणा और जनकल्याण का प्रतीक है। जहां किसी के साथ अन्याय नहीं होता, सभी को समान अवसर प्राप्त होते हैं और समाज में भाईचारे का वातावरण बना रहता है।महाराज श्री ने कहा कि आज के समय में भी भगवान श्रीराम के आदर्श उतने ही प्रासंगिक हैं जितने त्रेता युग में थे। यदि समाज के लोग मर्यादा, सत्य, त्याग और सेवा की भावना को अपने जीवन में उतार लें तो अनेक सामाजिक समस्याओं का समाधान स्वतः हो सकता है। कथा के दौरान श्रद्धालु बड़ी तन्मयता से उनके विचारों को सुनते रहे और समय-समय पर जय श्रीराम के उद्घोष से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। राम राज्याभिषेक प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर विशेष उत्साह देखने को मिला। भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने और उनके राजतिलक का प्रसंग सुनाते समय श्रद्धालु भावुक हो उठे। जैसे ही राज्याभिषेक की झांकी प्रस्तुत की गई, पूरा पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम को आदर्श राजा और धर्म के प्रतीक के रूप में नमन किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध भजन आज बिरज में होली रे रसिया की प्रस्तुति होते ही पूरा कथा पंडाल उत्सवमय हो गया। भजन की मधुर धुनों पर श्रद्धालु स्वयं को रोक नहीं सके और भक्ति भाव में झूम उठे। महिलाओं ने समूह बनाकर पारंपरिक अंदाज में नृत्य प्रस्तुत किया। पुरुष श्रद्धालुओं ने भी भजनों पर नृत्य कर अपनी आस्था का प्रदर्शन किया। कथा स्थल पर उपस्थित भक्तगण लंबे समय तक भक्ति रस में सराबोर होकर झूमते रहे। कार्यक्रम का सबसे आकर्षक दृश्य फूलों की होली रहा। भजनों और कीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे पर पुष्प वर्षा कर होली का आनंद लिया। गुलाब, गेंदे और अन्य सुगंधित फूलों की वर्षा से पूरा पंडाल महक उठा। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने समान उत्साह के साथ फूलों की होली खेली। इस दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वृंदावन की होली का दृश्य साकार हो उठा हो। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।
कथा के अंतिम दिन प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। एटा के जिलाधिकारी अरविंद सिंह विशेष रूप से कथा स्थल पहुंचे। उन्होंने भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक कार्यक्रम में भाग लिया और विधिवत रूप से राजतिलक की रस्म संपन्न कराई। जिलाधिकारी ने कथा आयोजकों को इस सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं तथा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम के आयोजक एवं भारतीय किसान यूनियन भानू के नेता भानु प्रताप सिंह ने जिलाधिकारी का स्वागत एवं सम्मान किया। उन्होंने कहा कि श्री राम कथा का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और सहभागिता के कारण ही यह आयोजन भव्य और सफल बन सका।
भानु प्रताप सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके आदर्शों को अपनाकर ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन भानू एवं क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह, राम प्रताप सिंह, मंजीत प्रताप सिंह, टिकैत प्रताप सिंह, सत्येंद्र सिंह, विक्रम सिंह, टोनी सिंह, धनंजय प्रताप सिंह और शिवा सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे। सभी ने कथा का श्रवण कर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कथा के समापन अवसर पर सामूहिक आरती का आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर भगवान श्रीराम की आरती उतारी। आरती के समय पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से परिपूर्ण हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम से सुख, शांति, समृद्धि और राष्ट्र कल्याण की प्रार्थना की। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। नौ दिनों तक चली इस श्री राम कथा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। कथा के दौरान राम जन्मोत्सव, सीता स्वयंवर, राम-सीता विवाह, वनगमन, लंका विजय और राम राज्याभिषेक जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और धार्मिक कार्यक्रमों को सफल बनाया। राम राज्याभिषेक, फूलों की होली और भव्य आरती के साथ संपन्न हुई इस श्री राम कथा ने क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का नया संचार किया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के जयकारों के साथ धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। देवलोक धाम का पूरा परिसर देर शाम तक भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा और श्रद्धालु अपने साथ भक्ति, आनंद और आध्यात्मिक ऊर्जा की अमूल्य स्मृतियां लेकर अपने घरों को लौटे।
रिपोर्टर : लखन यादव


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