दक्षिण गडचिरोली के आसरेल्ली को दत्तक लेकर विकास का मॉडल गांव बनाने की मांग

गडचिरोली : दक्षिण गडचिरोली जिले के सिरोंचा तहसील स्थित आसरेल्ली गांव के लोगों में राज्य के मुख्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल के प्रस्तावित दौरे को लेकर नई उम्मीदें जागृत हुई हैं। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों से वंचित रहे इस क्षेत्र के नागरिक अब मांग कर रहे हैं कि मुख्य सचिव स्वयं इस गांव को दत्तक लेकर इसके सर्वांगीण विकास की दिशा में विशेष पहल करें।

आसरेल्ली गांव भौगोलिक दृष्टि से महाराष्ट्र के सबसे दूरस्थ और उपेक्षित क्षेत्रों में से एक माना जाता है। राज्य की राजधानी मुंबई से लगभग 950 किलोमीटर तथा गडचिरोली जिला मुख्यालय से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित होने के कारण यह गांव लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से कट गया है। शासन-प्रशासन की योजनाएं यहां तक पहुंचने में अक्सर असफल रही हैं, जिसका खामियाजा गांव के हजारों नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
करीब 10 हजार की आबादी वाले आसरेल्ली गांव में आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, कृषि और सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव स्पष्ट दिखाई देता है। गांव में लगभग बीस वर्ष पहले सरकारी अस्पताल का निर्माण किया गया था, लेकिन अस्पताल में न तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता रही और न ही आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था सुचारू रूप से हो सकी। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को छोटी-बड़ी बीमारियों के उपचार के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। गांव में पहली कक्षा से लेकर बारहवीं तक की शिक्षा की व्यवस्था तो है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, पर्याप्त शिक्षक और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उचित मार्गदर्शन और संसाधनों के अभाव में वे प्रतिस्पर्धी अवसरों से पीछे रह जाते हैं।
आसरेल्ली का क्षेत्रफल काफी विस्तृत है, फिर भी गांव के अधिकांश हिस्सों में आज तक पक्की सड़कों का जाल नहीं बिछ पाया है। बरसात के दिनों में कई मार्गों पर आवागमन कठिन हो जाता है, जिससे नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार संबंधी कार्यों के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
कृषि क्षेत्र की समस्याएं भी कम गंभीर नहीं हैं। गोदावरी नदी के किनारे स्थित होने के कारण हर वर्ष बड़ी मात्रा में उपजाऊ कृषि भूमि नदी के कटाव में बह जाती है। दूसरी ओर जो भूमि बचती है, वहां उत्पादित फसलों को उचित मूल्य पर बेचने के लिए आसपास कोई बड़ा कृषि मंडी केंद्र उपलब्ध नहीं है। विशेष रूप से मिर्च उत्पादक किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नागपुर जैसे दूरस्थ बाजारों का रुख करना पड़ता है। वहीं तेलंगाना के वारंगल बाजार में दलालों के शोषण और अनियमित व्यापारिक व्यवस्था के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
विडंबना यह है कि इंद्रावती और गोदावरी जैसी विशाल नदियों के बीच बसे होने के बावजूद यहां के किसानों को सिंचाई के लिए इन नदियों के जल का समुचित लाभ नहीं मिल पाया है। यदि प्रभावी सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जाएं तो यह क्षेत्र कृषि उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि मुख्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल आसरेल्ली गांव को विशेष विकास योजना के अंतर्गत दत्तक लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, सिंचाई, कृषि विपणन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में समन्वित प्रयास करें, तो यह गांव दक्षिण गडचिरोली के विकास का आदर्श मॉडल बन सकता है।
मुख्य सचिव के आगमन को लेकर ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। लोगों को उम्मीद है कि उनका दौरा केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम साबित होगा। आसरेल्ली के नागरिकों की एक ही मांग है—"विकास की मुख्यधारा से दूर छूट चुके इस गांव को विशेष संरक्षण देकर आत्मनिर्भर और समृद्ध गांव बनाने की पहल की जाए।"

रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम

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