ताडीगुड़ा की जिला परिषद स्कूल बनी मिसाल,4 से बढ़कर 24 हुई छात्र संख्या
गड़चिरोली : गड़चिरोली जिले के पेरमिली केंद्र अंतर्गत स्थित अतिदुर्गम आदिवासी गांव ताडीगुड़ा की जिला परिषद प्राथमिक शाला आज ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है। एक समय छात्र संख्या घटकर केवल चार रह जाने से बंद होने की कगार पर पहुंचा यह विद्यालय आज 24 विद्यार्थियों के साथ फिर से गुलजार हो गया है। इस सफलता का श्रेय विद्यालय के प्रधानाध्यापक किशोर सुनतकर, केंद्र समन्वयक डॉ. दिवाकर नारनवरे, विद्यालय प्रबंधन समिति और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयासों को दिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, छात्र संख्या लगातार घटने के कारण विद्यालय का अस्तित्व संकट में था। ऐसी परिस्थिति में प्रधानाध्यापक किशोर सुनतकर ने हार मानने के बजाय गांव के प्रत्येक घर तक पहुंचकर अभिभावकों से संवाद किया। उन्होंने बच्चों को गांव के ही सरकारी विद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए शिक्षा के महत्व को समझाया और अभिभावकों का विश्वास जीतने का प्रयास किया।
प्रधानाध्यापक के इस अभियान को विद्यालय प्रबंधन समिति और ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिला। वहीं केंद्र समन्वयक डॉ. दिवाकर नारनवरे ने समय-समय पर मार्गदर्शन देकर इस पहल को मजबूती प्रदान की। सामूहिक प्रयासों का परिणाम यह रहा कि विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या चार से बढ़कर 24 हो गई।
विद्यालय परिसर को आकर्षक और बाल-मित्र वातावरण देने के लिए रंग-रोगन सहित अन्य आवश्यक सुधार कार्य भी किए गए। इससे बच्चों में विद्यालय के प्रति आकर्षण बढ़ा और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत हुआ।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक आयु में बच्चों को अपने गांव, परिवार और स्थानीय परिवेश में शिक्षा मिलने से उनके भावनात्मक एवं सामाजिक विकास को मजबूती मिलती है। ऐसे में ताडीगुड़ा का यह प्रयास ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
आज जब ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालय कम छात्र संख्या के कारण बंद होने के खतरे का सामना कर रहे हैं, तब ताडीगुड़ा की यह सफलता यह संदेश देती है कि यदि शिक्षक, अभिभावक, ग्रामवासी और विद्यालय प्रबंधन समिति मिलकर प्रयास करें तो किसी भी विद्यालय को नई पहचान दी जा सकती है।
ताडीगुड़ा की यह उपलब्धि साबित करती है कि "स्कूल बचेगा तो गांव बचेगा, और गांव बचेगा तो भविष्य सुरक्षित रहेगा।"
रिपोर्टर : संजय यमसलवार
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