₹97 हजार की घंटागाड़ी खरीद, गांव में एक बार भी नहीं चली?
मुलचेरा /गोमनी:
गोमनी ग्राम पंचायत के आर्थिक व्यवहार को लेकर ‘मेरी पंचायत’ ऐप पर सामने आई जानकारी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत के रिकॉर्ड में घंटागाड़ी के नाम पर कुल ₹97,303 का खर्च दिखाई दे रहा है। लेकिन दूसरी ओर, गांव में कचरा संकलन के लिए खरीदी गई घंटागाड़ी के नियमित रूप से चलने के बजाय कचरे और झाड़ियों के बीच पड़ी होने का आरोप सामने आया है।
‘मेरी पंचायत’ में तीन अलग-अलग भुगतानों की एंट्री
उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 में ‘Ghanta Gadi’ के नाम पर ₹65,500 तथा ₹7,723 की दो अलग-अलग भुगतान प्रविष्टियां दिखाई देती हैं। वहीं वर्ष 2025-26 में ‘Ghanta Gadi Kharedi Karane’ के नाम पर ₹24,080 का खर्च दर्ज है।
इन तीनों रकम को मिलाने पर कुल राशि ₹97,303 होती है।
₹24,080 की प्रविष्टि के साथ 10 सितंबर 2024 की वाउचर तारीख दिखाई दे रही है, जबकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित घंटागाड़ी की खरीद 10 फरवरी 2026 को होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में भुगतान, खरीद की तारीख और वास्तविक खरीद से जुड़े दस्तावेजों की जांच बेहद जरूरी हो जाती है। फरवरी माह में खरीदी गई घंटा गाडी 5-6 माह के भीतरही कचरे में जमा हो गई है यह बेहद हि हास्सासपद है और ग्रामपंचायत कार्यप्रणाली पर सवाल खडे करने वाली बात है।
लाखों नहीं, लेकिन जनता के ₹97 हजार—फिर गाड़ी सेवा में क्यों नहीं?
घंटागाड़ी खरीदने का उद्देश्य गांव में घर-घर से कचरा एकत्र करना और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना है। लेकिन यदि खरीदी गई गाड़ी वास्तव में गांव में कचरा संकलन के लिए इस्तेमाल ही नहीं हो रही है, तो जनता के पैसे से खरीद का उद्देश्य क्या रहा?
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या घंटागाड़ी को पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था में नियमित रूप से लगाया गया था या नहीं?
कर्मचारी के घर के पास कचरे में पड़ी होने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पंचायत द्वारा खरीदी गई घंटागाड़ी ग्राम पंचायत कर्मचारी के घर के पास कचरे और झाड़ियों के बीच पड़ी हुई दिखाई दे रही है।
यदि स्थलीय जांच में यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक होगा कि सार्वजनिक निधि से खरीदी गई पंचायत की संपत्ति को वहां रखने का आदेश किसने दिया और उसका सरकारी उपयोग क्यों नहीं हो रहा है।
अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
- घंटागाड़ी की वास्तविक खरीद कीमत कितनी है?
- ₹65,500, ₹7,723 और ₹24,080 की रकम किस-किस मकसद में खर्च हुई?
- क्या तीनों भुगतान एक ही घंटागाड़ी से संबंधित हैं?
- खरीद का बिल और GST इनवॉइस कहां है?
- ग्राम पंचायत का खरीद संबंधी प्रस्ताव और कोटेशन उपलब्ध है या नहीं?
- घंटागाड़ी पंचायत की संपत्ति रजिस्टर में दर्ज है या नहीं?
- वाहन का चेसिस/वाहन क्रमांक क्या है?
- यदि वाहन है तो उसका RTO पंजीयन हुआ है या नहीं?
- खरीद के बाद आज तक कचरा संकलन के लिए कितने दिन इसका उपयोग हुआ?
- और सबसे बड़ा सवाल—गांव की सफाई के लिए खरीदी गई घंटागाड़ी आखिर कचरे और झाड़ियों के बीच क्यों पड़ी है?
स्थलीय जांच और दस्तावेजों की जांच की मांग
इस पूरे मामले में पंचायत समिति मुलचेरा के गटविकास अधिकारी तथा संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष स्थलीय जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
जांच के दौरान खरीद बिल, GST इनवॉइस, कोटेशन, ग्राम पंचायत प्रस्ताव, वर्क ऑर्डर, भुगतान वाउचर, बैंक लेनदेन, संपत्ति रजिस्टर तथा घंटागाड़ी के उपयोग से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।
यदि सार्वजनिक धन से खरीदी गई घंटागाड़ी वास्तव में उपयोग में नहीं लाई जा रही है, तो इसकी जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों से जवाब लिया जाना आवश्यक है।
जनता के पैसों से गाड़ी खरीदी… लेकिन जनता की सेवा में आई या नहीं?
‘मेरी पंचायत’ के रिकॉर्ड में दिखाई दे रही ₹97,303 की कुल राशि और मौके पर घंटागाड़ी की कथित स्थिति ने गोमनी ग्राम पंचायत के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कर घंटागाड़ी की खरीद से लेकर उसके वर्तमान उपयोग तक का पूरा सच जनता के सामने लाता है या नहीं।
C NEWS BHARAT की नजर अब इस पूरे मामले की आधिकारिक जांच और ग्राम पंचायत के जवाब पर रहेगी।
रिपोर्टर: मारोती कोलावार मुलचेरा
No Previous Comments found.