जुर्माना वसूली तक ठेकेदार के सरकारी बिलों पर रहेगी नजर
गड्चिरौली : गड़चिरोली जिले के भामरागड़ तहसील में अवैध रूप से रेत का भंडारण कर उसका उपयोग किए जाने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला खनिकर्म अधिकारी, गड़चिरोली ने संबंधित ठेकेदार पर ₹84 लाख 34 हजार 600 का भारी जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि अब तक शासन के खाते में जमा नहीं होने के कारण संबंधित ठेकेदार अथवा कंपनी के किसी भी सरकारी बिल का भुगतान करने से पहले जिला खनिकर्म अधिकारी कार्यालय से ‘ना-हरकत प्रमाणपत्र’ (एनओसी) लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई शिकायत से हुई थी। जनकल्याण समाजोन्नती अन्याय भ्रष्टाचार निवारण समिति के जिला अध्यक्ष संतोष ताटीकोंडावार ने भामरागड़ क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और उसके उपयोग की शिकायत प्रशासन के समक्ष दर्ज कराई थी। उन्होंने मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद से ताटीकोंडावार लगातार इस मामले का प्रशासनिक स्तर पर पीछा करते रहे।
466 ब्रास अवैध रेत का भंडारण और उपयोग
जिला खनिकर्म अधिकारी, गड़चिरोली द्वारा 23 मार्च 2026 को जारी पत्र के अनुसार, जे. जी. एस. डी. इंडस्ट्रीज, भामरागड़ (प्रो. प्रा. गजानन मेढे) के मामले में 466 ब्रास रेत का अवैध भंडारण कर उसका उपयोग किए जाने की बात सामने आई है।
आदेश में उल्लेख किया गया है कि उक्त रेत का उपयोग ताडगांव स्थित बांदिया नदी पर पुल निर्माण कार्य तथा मौजा अहेरी में महिला एवं बाल चिकित्सालय के निर्माण कार्य में किया गया। मामले की जांच के बाद संबंधित पक्ष के विरुद्ध ₹84,34,600 का दंड निर्धारित किया गया है।
सरकारी भुगतान से पहले लेनी होगी खनिकर्म कार्यालय की मंजूरी
हालांकि जुर्माने की राशि निर्धारित किए जाने के बावजूद संबंधित ठेकेदार द्वारा अब तक यह रकम शासन के खाते में जमा नहीं की गई है। इसे देखते हुए जिला खनिकर्म कार्यालय ने वसूली सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
कार्यकारी अभियंता, राष्ट्रीय महामार्ग विभाग, गड़चिरोली तथा कार्यकारी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, आलापल्ली को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि संबंधित ठेकेदार या कंपनी के किसी भी कार्य का बिल अथवा अन्य सरकारी देयक भुगतान करने से पहले जिला खनिकर्म अधिकारी, गड़चिरोली कार्यालय से ‘ना-हरकत’ प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जुर्माने की राशि की वसूली से पहले संबंधित ठेकेदार को नियमों के विपरीत कोई सरकारी भुगतान न किया जाए।
केवल जुर्माना लगाना नहीं, उसकी वसूली भी जरूरी : ताटीकोंडावार
इस कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए शिकायतकर्ता संतोष ताटीकोंडावार ने कहा कि प्रशासन द्वारा जुर्माना लगाना महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन कार्रवाई केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शासन की प्राकृतिक संपदा का अवैध रूप से दोहन करने वालों से जुर्माने की पूरी राशि वसूल कर उसे शासन के खजाने में जमा कराना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने राष्ट्रीय महामार्ग विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग से भी आदेश का कड़ाई से पालन करने की मांग की है, ताकि संबंधित ठेकेदार या कंपनी को किसी प्रकार का अनुचित सरकारी भुगतान न हो सके।
«“अवैध गौण खनिज उत्खनन करने वालों पर केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस जुर्माने की पूरी राशि की वसूली होना सबसे ज्यादा जरूरी है। शासन की प्राकृतिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। इस मामले में ₹84.34 लाख का पूरा जुर्माना शासन के खजाने में जमा होने तक हमारा प्रशासन के समक्ष लगातार पाठपुरावा जारी रहेगा।”
— संतोष ताटीकोंडावार, जिला अध्यक्ष, जनकल्याण समाजोन्नती अन्याय भ्रष्टाचार निवारण समिति, गड़चिरोली»
प्रशासन की इस कार्रवाई से भामरागड़ के अवैध रेत प्रकरण ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ₹84.34 लाख की जुर्माना राशि की वास्तविक वसूली कब तक होती है और संबंधित विभाग खनिकर्म कार्यालय के निर्देशों का कितनी सख्ती से पालन करते हैं।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार
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