इंजेक्शन लगाने के कुछ ही मिनट बाद बच्चे की मौत का आरोप डॉक्टर नर्स और पुलिसकर्मियों
गडचिरोली - जिले के सिरोंचा तहसील के रंगयापल्ली गांव में एक बच्चे की ग्रामीण अस्पताल, सिरोंचा में इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही मिनट बाद मौत होने का गंभीर आरोप सामने आया है। मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच कर दोषी पाए जाने वाले डॉक्टर और नर्स के साथ ही शिकायत दर्ज करने में कथित रूप से टालमटोल करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। इस संबंध में मादगी समाज संगठन और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (रिपाई) के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिलाधिकारी आशिष वानखेडे तथा गडचिरोली के पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मृतक बच्चे के पिता मोहन मल्लया चेन्नुरी के हवाले से बताया गया है कि वे अपने बच्चे को जांच के लिए सिरोंचा ग्रामीण अस्पताल लेकर गए थे। परिजनों के अनुसार उस समय बच्चा सामान्य स्थिति में था और हंस-खेल रहा था। किसी गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं थे। आरोप है कि संबंधित डॉक्टर की सलाह पर नर्स ने बच्चे को इंजेक्शन लगाया। इसके करीब पांच मिनट बाद ही बच्चे की मौत हो गई।
पुलिस पर शिकायत दर्ज नहीं करने का आरोप बच्चे की मौत के बाद माता-पिता शिकायत दर्ज कराने के लिए सिरोंचा पुलिस थाने पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की। इतना ही नहीं, दुख की स्थिति में मौजूद बच्चे के पिता के साथ एक पुलिस कर्मचारी द्वारा कथित रूप से मारपीट किए जाने का भी आरोप ज्ञापन में लगाया गया है।
घटना के बाद बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए गडचिरोली के जिला सामान्य अस्पताल भेजा गया। हालांकि, घटना को करीब दो महीने बीत जाने के बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है, ऐसा दावा ज्ञापन में किया गया है। रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण बच्चे की मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
दोषियों पर मानव वध का मामला दर्ज करने की मांग मादगी समाज संगठन और रिपाई ने मांग की है कि सिरोंचा ग्रामीण अस्पताल के संबंधित डॉक्टर एवं नर्स तथा सिरोंचा पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। जांच में यदि लापरवाही अथवा अपराध सिद्ध होता है तो संबंधितों के खिलाफ मानव वध सहित लागू कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा पुलिसकर्मियों द्वारा कथित दुर्व्यवहार के आरोपों की भी जांच कर, आरोप प्रमाणित होने पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई है। पीड़ित परिवार को शासन की ओर से उचित आर्थिक सहायता देने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से की गई।
निष्पक्ष जांच की मांग प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बच्चे की मौत का वास्तविक कारण चिकित्सकीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होना आवश्यक है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और गहन जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। ज्ञापन सौंपते समय मादगी समाज संगठन के संस्थापक एवं कार्याध्यक्ष डॉ. समय्या पसुला, रिपाई नेता गोपाल रायपुरे, रिपाई जिलाध्यक्ष प्रा. मुनिश्वर बोरकर, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष डॉ. समय्या पसुला, मृतक बच्चे के पिता मोहन चेन्नुरी, माता गंगू चेन्नुरी सहित प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उपस्थित थे।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार
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