आंगनवाड़ी केवल आहार वितरण का केंद्र नहीं, बच्चों के सर्वांगीण विकास का आधार बने – सुहास गाडे
गडचिरोली : आंगनवाड़ी केंद्र केवल आहार वितरण तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों के पोषण के साथ-साथ उनके शारीरिक, बौद्धिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किए जाएं। इसके लिए शासन के प्रयासों के साथ ही माता-पिता और स्थानीय समुदाय को भी आंगनवाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी स्वीकार कर सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए, ऐसा प्रतिपादन जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे ने किया।
‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0’ के अंतर्गत नववां राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला परिषद गड़चिरोली की ओर से 17 सितंबर को सहायक आयुक्त, समाज कल्याण विभाग के सभागृह में जिला स्तरीय उद्घाटन एवं एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर सुहास गाडे मार्गदर्शन कर रहे थे।
कार्यक्रम में जिला परिषद के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेंद्र भुयार, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास दीपक बानाइत, सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षिकाएं, आंगनवाड़ी सेविकाएं तथा अभिभावक उपस्थित थे।
आंगनवाड़ी सशक्तिकरण के लिए प्रभावी नियोजन पर जोर
सुहास गाडे ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों का उपयोग बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अधिक प्रभावी तरीके से हो, इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक नियोजन करना चाहिए।
बच्चों का पोषण, पूर्व प्राथमिक शिक्षा, बाल्यावस्था में उचित उद्दीपन तथा माता-बाल स्वास्थ्य को एक साथ ध्यान में रखते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र गांव में माता और बच्चों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इसलिए इनकी पहचान केवल ‘खाऊ अथवा आहार वितरण केंद्र’ के रूप में न रहकर बच्चे के विकास के मजबूत आधार के रूप में होनी चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित विभागों और यंत्रणाओं को समन्वय के साथ काम करना आवश्यक है।
‘मिशन संपूर्ण’ के तहत गर्भवती और स्तनदा माताओं को संपूर्ण भोजन
गड़चिरोली जिले में WCL-CSR के माध्यम से ‘मिशन संपूर्ण’ नामक विशेष उपक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले की सभी गर्भवती एवं स्तनदा माताओं को आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से प्रतिदिन एक समय का संपूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
गर्भवती और स्तनदा माताओं के पोषण स्तर में सुधार कर माता एवं बच्चे के स्वास्थ्य को मजबूत करने की दृष्टि से यह उपक्रम महत्वपूर्ण है। इसकी प्रभावी अमलदारी के साथ ही प्रत्येक पात्र महिला तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए आंगनवाड़ी स्तर पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
‘हमारी आंगनवाड़ी–हमारी जिम्मेदारी’ से बढ़ेगी जनभागीदारी
इस वर्ष के राष्ट्रीय पोषण माह की केंद्रीय संकल्पना ‘हमारी आंगनवाड़ी–हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। इसके माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के कामकाज में स्थानीय समुदाय की भागीदारी, स्वामित्व की भावना और जिम्मेदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
ग्राम पंचायत, महिला स्वयं सहायता समूह, माता समितियां, अभिभावक, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय नागरिक आंगनवाड़ी केंद्रों की स्वच्छता एवं सुरक्षा, परिसर का सौंदर्यीकरण, बच्चों की नियमित उपस्थिति, पोषण आहार की गुणवत्ता तथा बच्चों के विकास से संबंधित गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करें, ऐसा आह्वान किया गया।
9 सितंबर से 9 अक्टूबर 2026 तक राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत जिले के प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में विभिन्न जनजागरूकता एवं जनभागीदारी आधारित गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
पांच प्रमुख विषयों पर रहेगा विशेष ध्यान
इस वर्ष के पोषण माह में पांच प्रमुख विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इनमें—
- आहार में विविधता एवं पर्याप्त प्रोटीन
- आंगनवाड़ी केंद्र में तैयार किया गया गर्म एवं ताजा भोजन
- स्थानीय समुदाय का स्वामित्व एवं जिम्मेदारी
- बच्चों के विकास के लिए पोषण एवं बाल्यावस्था उद्दीपन
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
का समावेश है।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनदा माताओं के आहार में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दूध एवं दुग्धजन्य पदार्थ, अंडे तथा अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों को उचित मात्रा में शामिल करने को लेकर जनजागरूकता करने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को दिए जाने वाले गर्म एवं ताजे पके भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता, स्वच्छता और सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
स्थानीय सामग्री से खिलौने बनाने का दिया गया प्रशिक्षण
कार्यशाला में बच्चों के विकास में विभिन्न खेलों के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर खिलौने एवं शैक्षणिक साधन किस प्रकार तैयार किए जा सकते हैं, इसका प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया।
बच्चे के जीवन के पहले छह वर्ष शारीरिक, बौद्धिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की आयु के अनुसार खेल, कहानियां, गीत, संवाद तथा विभिन्न बाल्यावस्था उद्दीपन गतिविधियां आयोजित करने पर जोर दिया गया।
अभिभावकों को भी बच्चों के साथ नियमित संवाद करने, उनके साथ खेलने तथा घर में सीखने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के महत्व की जानकारी दी गई।
THR से पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन बनाने का प्रदर्शन
आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिए जाने वाले घर ले जाने वाले पूरक पोषण आहार (Take Home Ration–THR) से घर पर ही स्वास्थ्यवर्धक, पौष्टिक और स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ किस प्रकार तैयार किए जा सकते हैं, इसका प्रदर्शन एवं प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।
इसका उद्देश्य परिवारों में उपलब्ध पोषण सामग्री का उचित उपयोग बढ़ाना तथा बच्चों एवं माताओं के आहार को अधिक पौष्टिक बनाना है।
जीवन के पहले 1000 दिन बेहद महत्वपूर्ण
कार्यशाला में बताया गया कि गर्भधारण से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक के पहले 1000 दिन माता एवं बच्चे के स्वास्थ्य तथा बच्चे के भविष्य के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
इस अवधि में उचित पोषण, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता और बच्चे की उचित देखभाल पर विशेष ध्यान देने के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाने के निर्देश
गर्भवती महिलाओं एवं स्तनदा माताओं के लिए लागू प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) की जानकारी प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
पात्र महिलाओं को योजना की प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी देने तथा कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिए गए।
पोषण माह के बाद भी जारी रहें प्रयास
मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान चलाए जाने वाले उपक्रम केवल एक माह तक सीमित नहीं रहने चाहिए। बच्चों में पोषण संबंधी अच्छी आदतें, अभिभावकों की सहभागिता और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक सकारात्मक बदलाव निरंतर जारी रहना आवश्यक है।
‘सक्षम बालक–सुदृढ़ माता–पोषणयुक्त परिवार–सक्षम आंगनवाड़ी’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ माता-पिता और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षिकाएं, आंगनवाड़ी सेविकाएं, अभिभावक तथा संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। यह जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला परिषद गड़चिरोली की ओर से दी गई।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार
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