वन्यजीव सप्ताह का जोरदार प्रचार; वनभूमि पर अतिक्रमण को लेकर वन विभाग की चुप्पी क्यों?

गडचिरोली - अहेरी वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर वन विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण का जोरदार प्रचार किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर अहेरी शहर में वनभूमि पर कथित अतिक्रमण के मुद्दे पर वन विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। अहेरी शहर के कथित वार्ड क्रमांक 14 में वनभूमि पर हुए अतिक्रमण के संबंध में जागरूक नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा संबंधित विभाग से लगातार संपर्क कर कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आ रही है। इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद प्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

एक ओर वन्यजीव सप्ताह का उत्साह, दूसरी ओर वनभूमि संरक्षण का सवाल

क्या वन्यजीव सप्ताह केवल कार्यक्रमों, जनजागृति और वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट प्रस्तुत करने तक ही सीमित रहेगा? ऐसा सवाल अब नागरिकों द्वारा उठाया जा रहा है। वन्यजीवों और जंगलों के संरक्षण का संदेश देते समय वास्तविक वनभूमि का संरक्षण तथा अतिक्रमण रोकना भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र वन विभाग के आधिकारिक प्रबंधन दस्तावेज में वनभूमि पर अतिक्रमण का रिकॉर्ड रखना, संवेदनशील सीमाओं का सर्वेक्षण एवं सीमांकन करना तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पात्र मामलों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है।

क्या वन विभाग पूरे अतिक्रमण के नियमित होने का इंतजार कर रहा है?

अहेरी में वनभूमि पर कथित अतिक्रमण के संबंध में समय रहते निरीक्षण, माप-जोख, सीमांकन और कानूनी प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो भविष्य में अतिक्रमण का विस्तार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में क्या प्रशासन अतिक्रमण की ओर से आंखें मूंदे हुए है, या फिर अतिक्रमण पूरी तरह बढ़ जाने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी? यह सवाल नागरिकों द्वारा उठाया जा रहा है।

केवल आश्वासन; प्रत्यक्ष कार्रवाई कब?

अतिक्रमण के संबंध में कार्रवाई की जाएगी, ऐसे आश्वासन मिलने के बावजूद वास्तव में कार्रवाई कब होगी, इसका जवाब अभी तक नहीं मिला है, ऐसा नागरिकों का आरोप है। इस बीच, अहेरी में वन विभाग का कार्यालय उपलब्ध है। वहीं गडचिरोली जिले के वन विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार अहेरी तहसील अल्लापल्ली वन विभाग के कार्यक्षेत्र से संबंधित है।

वरिष्ठ अधिकारियों से ध्यान देने की मांग

वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने के साथ-साथ अहेरी शहर में वनभूमि पर कथित अतिक्रमण की प्रत्यक्ष जांच की जाए। संबंधित जमीन वनभूमि है या नहीं, उसका सीमांकन क्या है, अतिक्रमण कितना है और अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए, ऐसी मांग नागरिकों द्वारा की जा रही है। वन्यजीव सप्ताह का वास्तविक अर्थ वन्यजीवों के साथ-साथ वनभूमि का संरक्षण करना भी है। इसलिए अहेरी के कथित वार्ड क्रमांक 14 में अतिक्रमण के मुद्दे पर वन विभाग अब अपनी चुप्पी तोड़कर प्रत्यक्ष कार्रवाई का मुहूर्त निकालेगा क्या? यह सवाल फिलहाल नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

रिपोर्टर - प्रशांत नामनवार 

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