मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने अंबाली के मार्ग पर अपनी गाड़ी रोककर बच्चों तथा ग्रामीणों से मुलाकात की

गांधीनगर : मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल शुक्रवार को वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम के बाद गांधीनगर लौट रहे थे। उस समय जब मुख्यमंत्री का काफिला आणंद जिले के आंकलाव तहसील के अंबाली गांव के पास से गुजर रहा था, तब एक हृदयस्पर्शी दृश्य देखने को मिला। स्कूल की छुट्टी के बाद यूनिफॉर्म पहने मासूम बच्चे एवं स्थानीय ग्रामीण मुख्यमंत्री की एक झलक पाने के लिए उत्सुकता से सड़क के किनारे खड़े थे। तभी मुख्यमंत्री की नजर इन बच्चों और ग्रामीणों पर पड़ी और उन्होंने बिना एक क्षण की भी देर किए अपनी गाड़ी तुरंत रुकवा दी।

मुख्यमंत्री ने प्रोटोकॉल की सभी सीमाओं को एक ओर रखकर अपनी गाड़ी से नीचे उतरकर सीधे बच्चों की ओर कदम बढ़ाए। गांव की धूलभरी सड़क पर प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर बच्चों के चेहरे आश्चर्य और खुशी से खिल उठे। मुख्यमंत्री ने बिना किसी औपचारिकता के बच्चों से बालसुलभ भाषा में संवाद किया और "किस स्कूल में पढ़ते हो?", "क्या पढ़ाई करते हो?" जैसे स्नेह भरे प्रश्न पूछकर उन्होंने बच्चों की पीठ थपथपाई और उन्हें पढ़-लिखकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि एक बड़े-बुजुर्ग के अपने बच्चों के प्रति स्नेह का एहसास कराने वाली थी।
बच्चों से मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित ग्रामीणों से भी अत्यंत आत्मीयता के साथ बातचीत की। "गांव में कोई परेशानी तो नहीं है?" ऐसा पूछकर उन्होंने प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत किया।
उन्होंने अभिभावकों से बलपूर्वक कहा कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों की शिक्षा से समझौता न करें और उन्हें अवश्य पढ़ाएं। मुख्यमंत्री की यह संवेदनशीलता और सामान्य नागरिकों के प्रति उनकी चिंता ग्रामीणों के हृदय को छू गई।
इस दौरान मुख्यमंत्री की नजर पास के एक घर में संचालित गोबर गैस प्लांट पर पड़ी। वे तुरंत प्लांट के मालिक विठ्ठलभाई परमार के पास पहुंचे और उनसे गोबर गैस प्लांट के उपयोग, उससे होने वाले लाभ तथा यह प्लांट कब से कार्यरत है, इस संबंध में गहराई से जानकारी प्राप्त की।
सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठा व्यक्ति एक सामान्य किसान से इतनी सहजता से बातचीत करे, यह दृश्य वास्तव में अद्वितीय था।
मुख्यमंत्री की इस अप्रत्याशित मुलाकात और उनके सरल स्वभाव से भावविभोर हुए विठ्ठलभाई ने गर्व के साथ कहा, "हमें तो सपने में भी नहीं लगा था कि राज्य के मुख्यमंत्री अपनी गाड़ी रोककर हमारा हालचाल पूछने के लिए खड़े होंगे। यह हमारे और पूरे अंबाली गांव के लिए अत्यंत खुशी और गौरव का क्षण है।”मुख्यमंत्री की इस सहजता ने यह सिद्ध कर दिया कि जब शासन संवेदनशील होता है, तब लोकतंत्र सही मायनों में सार्थक बनता है।
रिपोर्टर : राकेश शाह गांधीनगर

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