गुलाब और रजनीगंधा की खुशबू से महकेगी प्रभु की पर्णकुटी, 551 व्यंजनों से सजेगा राजभोग

गंजबासौदा - एक ओर मोगरा, गुलाब और रजनीगंधा की भीनी-भीनी सुगंध,दूसरी ओर 551 प्रकार के व्यंजनों से सजी महाप्रभु की थाल। श्री नौलखी मंदिर में शुक्रवार को भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी का ऐसा अलौकिक श्रृंगार होगा, जहां भक्तों को भक्ति, सौंदर्य और प्रसाद परंपरा के दुर्लभ आनंद उत्सव के क्षण देखने को मिलेगें। उल्लेखनीय है कि स्टेशन रोड स्थित श्री नौलखी मंदिर में विराजमान महाप्रभु के रथ महोत्सव के उपलक्ष में प्रतिदिन 56 भोग,भगवान जगन्नाथ की महात्म कथा, भजन संध्या सहित अन्य धार्मिक आयोजन आयोजित हो रहे हैं। शुक्रवार 24 जुलाई को मंदिर की श्री सीताराम संकीर्तन मंडल की ओर से रात्रि 8 बजे संकीर्तन के उपरांत भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी को 551 प्रकार की दिव्य प्रसादी का महाभोग अर्पित किया जाएगा। शुक्रवार को भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी के लिए विशेष राजभोग एवं पुष्प श्रृंगार का आयोजन किया जाएगा। मंदिर परिसर में प्रभु की पर्णकुटी को मोगरा, गुलाब और रजनीगंधा के हजारों सुगंधित फूलों से सजाया जा रहा है। जैसे-जैसे संध्या ढलेगी, फूलों की महक से पूरा धाम भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठेगा। रात्रि 8 बजे संकीर्तन की मधुर स्वर लहरियों के बीच भगवान श्रीजगन्नाथ के श्रीचरणों में 551 प्रकार की दिव्य प्रसादी अर्पित की जाएगी। श्रद्धा और समर्पण से सजी यह विशाल थाल भगवान को समर्पित होने के बाद महाप्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं तक पहुंचेगी।

आयोजन समिति के अनुसार मंदिर की सजावट पारंपरिक और प्राकृतिक शैली में की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को पुरी श्रीमंदिर की झलक का अनुभव हो सके। सुगंधित पुष्पों से सजी पर्णकुटी, दीपों की आभा, संकीर्तन की गूंज और महाभोग का दिव्य दृश्य इस आयोजन को आध्यात्मिक उत्सव का स्वरूप देगा। समिति ने नगर एवं आसपास के श्रद्धालुओं से इस दुर्लभ आयोजन में शामिल होकर भगवान श्रीजगन्नाथ के दिव्य दर्शन, पुष्प श्रृंगार और महाप्रसाद का पुण्य लाभ लेने की अपील की है। आयोजन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। 551 व्यंजनों की थाल क्यों है खास? नौलखी खालसा श्रीमहंत राम मनोहर दास जी महाराज ने बताया कि भगवान श्रीजगन्नाथ की परंपरा में अन्न और प्रसाद को ईश्वर की कृपा का स्वरूप माना गया है। विविध व्यंजनों का महाभोग केवल भोजन नहीं, बल्कि भक्तों की श्रद्धा, सेवा और समर्पण की अभिव्यक्ति है। यही प्रसाद बाद में महाप्रसाद बनकर सभी भक्तों को समान भाव से वितरित किया जाता है। श्रीसीताराम संकीर्तन मंडल का भक्ति और भाव से समर्पित सभी मंडल सदस्यों की ओर से यह भव्य आयोजन है।

रिपोर्टर - हेमंत आनंद 

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