गुना में युवक की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप,कंपनी के प्लांट में फांसी पर मिला रुद्रप्रकाश का शव, मां ने उठाए गंभीर सवाल
गुना : मध्य प्रदेश के गुना जिले के विजयपुर थाना क्षेत्र में एक कंपनी के प्लांट में रीवा निवासी युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक रुद्रप्रकाश पटेल, निवासी ग्राम गोरगांव, जिला रीवा, मार्च 2026 से विजयपुर थाना क्षेत्र में स्थित गोड़क कंपनी/कंस्ट्रक्शन लाइन में कार्यरत था। 24 अगस्त को प्लांट के अंदर उसकी मौत की सूचना परिवार को मिली। कंपनी की ओर से घटना को फांसी लगाकर आत्महत्या से जोड़कर बताया गया, लेकिन मृतक की मां स्मृता पटेल ने पुलिस अधीक्षक गुना को आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि रुद्रप्रकाश सामान्य रूप से काम कर रहा था और परिवार को ऐसी किसी गंभीर व्यक्तिगत या मानसिक परेशानी की जानकारी नहीं थी, जिससे वह आत्महत्या जैसा कदम उठाए। इसी वजह से परिवार ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए हत्या सहित सभी संभावित पहलुओं की जांच की मांग की है।
फंदे की घटना पर सबसे बड़ा सवाल—पैरों के नीचे रखा फिल्टर अपनी जगह से नहीं हिला!
मृतक की मां द्वारा दिए गए आवेदन में घटनास्थल की परिस्थितियों को लेकर बेहद गंभीर सवाल उठाए गए हैं। परिजनों के अनुसार जिस स्थान पर रुद्रप्रकाश फंदे पर मिला, वहां उसके पैरों के नीचे रखा ग्रेडर का फिल्टर कथित तौर पर अपनी जगह पर ही था। वह गिरा हुआ नहीं मिला और न ही इधर-उधर हुआ। यही नहीं,परिजनों के मुताबिक जिस कमरे में शव मिला,उसका गेट खुला हुआ था और अंदर से कुंडी लगी हुई नहीं थी। आवेदन में फंदे में स्पष्ट गांठ नहीं मिलने की बात भी कही गई है। इन परिस्थितियों को लेकर परिवार का सवाल है कि यदि युवक ने स्वयं फांसी लगाई तो घटनास्थल पर मौजूद वस्तुओं की स्थिति ऐसी क्यों थी? हालांकि इन सवालों का अंतिम जवाब फोरेंसिक जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों से ही सामने आ सकता है।
CCTV से खुलेगा मौत का राज?
परिवार ने पुलिस से मांग की है कि कंपनी और प्लांट परिसर में लगे सभी CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग तत्काल सुरक्षित कराई जाए। खास तौर पर 24 अगस्त को रुद्रप्रकाश के प्लांट में प्रवेश करने से लेकर शव मिलने तक की पूरी गतिविधि की जांच हो। उसके साथ कौन-कौन लोग संपर्क में आए, घटना के समय कौन कहां मौजूद था और सूचना सबसे पहले किस व्यक्ति को मिली—इन सभी बिंदुओं की जांच की मांग की गई है।
परिजनों का कहना है कि CCTV फुटेज इस मामले की जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है मोबाइल और कॉल डिटेल की भी हो जांच
परिवार ने मृतक के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, WhatsApp चैट, सोशल मीडिया गतिविधियों, अंतिम कॉल और अंतिम बातचीत की जांच कराने की मांग की है।साथ ही उसके साथ रहने वाले गौरव पटेल, पुष्पेंद्र लोधी, रोहित, पवन और कृष्ण सहित संबंधित लोगों से अलग-अलग पूछताछ कर उनके बयानों का CCTV और अन्य साक्ष्यों से मिलान कराने की मांग की गई है।
पोस्टमार्टम को लेकर भी उठी जांच की मांग
मृतक के परिवार ने आवेदन में यह भी कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि पोस्टमार्टम कंपनी के मेडिकल विभाग से जुड़े बताए जा रहे डॉ. अंकित उपाध्याय द्वारा किया गया। इसी कारण परिवार ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया एवं रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।परिजनों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से दूसरी चिकित्सकीय राय ली जाए,ताकि मृत्यु के कारण और शरीर पर पाए गए प्रत्येक निशान की निष्पक्ष चिकित्सा जांच हो सके।
परिवार की मांग—आत्महत्या मानकर फाइल बंद न हो
मृतक की मां ने पुलिस अधीक्षक गुना से स्पष्ट मांग की है कि मामले को शुरुआत से ही केवल आत्महत्या मानकर जांच समाप्त न किया जाए। हत्या, आपराधिक षड्यंत्र अथवा घटना के बाद साक्ष्य प्रभावित करने की किसी संभावना सहित सभी पहलुओं की जांच की जाए। परिवार ने यह भी मांग की है कि यदि CCTV फुटेज, मोबाइल डाटा, फोरेंसिक रिपोर्ट अथवा अन्य साक्ष्यों से किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
‘कंपनी प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में आए’
परिजनों का कहना है कि मौत कंपनी के प्लांट परिसर में हुई है,इसलिए कंपनी प्रबंधन, संबंधित कर्मचारियों और घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। परिवार किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसाने की मांग नहीं कर रहा, बल्कि यह चाहता है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट किया जाए कि रुद्रप्रकाश की मौत वास्तव में आत्महत्या थी या उसकी मौत के पीछे कोई अन्य आपराधिक कारण था।
एक मां का सवाल—बेटे की मौत की असली वजह कौन बताएगा?
एक मां ने अपना जवान बेटा खो दिया है। परिवार के सामने आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 24 अगस्त को प्लांट के अंदर ऐसा क्या हुआ था? फंदे की स्थिति, फिल्टर का अपनी जगह पर रहना, खुले कमरे का दरवाजा, CCTV फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट—इन सभी सवालों के जवाब जांच में सामने आना जरूरी है। अब नजर पुलिस की जांच पर है। यदि जांच निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से होती है तो इन सवालों के जवाब मिल सकते हैं और यदि किसी व्यक्ति अथवा कंपनी से जुड़े किसी जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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