पूर्व सीआई कार्यालय की जमीन पर नया खुलासा
चौपारण (हजारीबाग) : चौपारण बस स्टैंड के समीप स्थित पूर्व सीआई कार्यालय की बहुमूल्य भूमि को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहले भाग में सरकारी भूमि के स्वामित्व और हस्तांतरण पर सवाल उठे थे, वहीं अब स्थानीय ग्रामीणों ने कई नए दावे करते हुए पूरे मामले की न्यायिक अथवा उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुराने राजस्व अभिलेख, न्यायालयीन दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये मूल्य की इस भूमि से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।ग्रामीणों का दावा है कि यह भूमि मूल रूप से नारो राणा के पूर्वजों की थी, जिसे तत्कालीन सीआई कार्यालय के संचालन के लिए दान स्वरूप दिया गया था। वर्षों तक यहां सीआई कार्यालय संचालित हुआ, सरकारी कर्मचारी रहते थे और परिसर में बने भवन इसका प्रमाण हैं। उनका आरोप है कि बाद के वर्षों में कथित मिलीभगत से भूमि का नामांतरण निजी पक्ष के नाम करा दिया गया।ग्रामीणों का कहना है कि भूमि विवाद का मामला न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन उस समय सरकारी पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं होने के कारण निजी पक्ष को एकतरफा राहत मिल गई। उनका आरोप है कि यदि संबंधित विभाग मजबूती से अपना पक्ष रखता तो सरकारी संपत्ति का स्वरूप बरकरार रह सकता था।स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि पुराने राजस्व अभिलेखों में यह भूमि बिहार सरकार के नाम दर्ज रही है। उनका कहना है कि वर्तमान रिकॉर्ड, पुराने खतियान, जमाबंदी,रसीद,न्यायालयीन आदेश और अन्य सरकारी दस्तावेजों का मिलान कराया जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि करोड़ों रुपये मूल्य की इस भूमि पर भू-माफियाओं की नजर बनी हुई है।ग्रामीणों ने यह भी चिंता जताई कि भूमि के पीछे बड़ी हरिजन बस्ती है, जहां हजारों लोग रहते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की स्थिति बनती है तो इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव गरीब और कमजोर वर्ग पर पड़ेगा।ग्रामीणों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
रिपोर्टर : अमित सिंह
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