पीएमसी ने अभय योजना की समयसीमा 15 मार्च तक बढ़ाई, संपत्ति कर बकायेदारों को राहत
पुणे : पुणे नगर निगम (PMC) ने संपत्ति कर बकायेदारों के लिए अपनी अभय योजना की समयसीमा एक महीने के लिए बढ़ा दी है, जिससे बकाया भुगतान वाले हजारों नागरिकों को राहत मिली है। यह निर्णय शुक्रवार को हुई सामान्य सभा की बैठक में पार्षदों द्वारा उठाई गई मांग के बाद लिया गया।
इस विस्तार के बाद अब संपत्ति मालिक 15 मार्च तक इस योजना के तहत अपना बकाया संपत्ति कर जमा कर सकते हैं।
नगर निगम ने 15 नवंबर को अभय योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य हजारों करोड़ रुपये के लंबित संपत्ति कर की वसूली करना था। इस योजना के तहत बकाया कर की ब्याज राशि पर 75 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य निगम की आय बढ़ाना और बकायेदारों को आर्थिक राहत देना है।
इससे पहले योजना को मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया को देखते हुए नगर आयुक्त नवल किशोर राम ने 16 जनवरी से 15 फरवरी तक एक महीने का विस्तार दिया था। चूंकि संशोधित समयसीमा 15 फरवरी को समाप्त होने वाली थी, इसलिए सामान्य सभा में पार्षदों ने इसे आगे बढ़ाने की मांग की।
पार्षद अविनाश साल्वे ने कहा कि इस योजना से बकायेदारों को काफी राहत मिली है, लेकिन अभी भी कई नागरिक इसके लाभ से वंचित हैं। उन्होंने प्रशासन से समयसीमा एक महीने और बढ़ाने का आग्रह किया।
पार्षद बाबूराव चंदेरे ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि योजना का विस्तार नागरिकों और नगर निगम दोनों के लिए लाभकारी होगा।
सदन के नेता गणेश बिडकर ने सुझाव दिया कि महापौर और प्रशासन को नागरिकों के हित में इस विस्तार पर विचार करना चाहिए, जिससे नगर निगम की आय में भी वृद्धि होगी।
पार्षदों की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए आयुक्त राम ने आश्वासन दिया कि प्रशासन इस अनुरोध पर विचार करेगा। इसके बाद संपत्ति कर विभाग ने अभय योजना को एक महीने के लिए बढ़ाने की घोषणा की, जिससे बकायेदार अब 15 मार्च तक अपना बकाया जमा कर सकेंगे।
एमनेस्टी योजना को मिला मजबूत प्रतिसाद
पीएमसी ने बताया कि अभय योजना को बकायेदारों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। 13 फरवरी तक 1.35 लाख से अधिक संपत्ति कर बकायेदार इस योजना के तहत अपना बकाया चुका चुके हैं। इस पहल के माध्यम से अब तक 801 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है।
अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह योजना मूल रूप से 15 फरवरी को समाप्त होने वाली थी, लेकिन प्रतिक्रिया और लंबित वसूली को देखते हुए प्रशासन इसके विस्तार पर विचार कर रहा था।
संवादाता : यश सोलंकी


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